जयपुर

‘राजस्थान की कर्मभूमि से आगाज़, जयपुर में गुजारे 10 साल’, 100वें वर्ष में प्रवेश करने पर जानिए लालकृष्ण आडवाणी की ख़ास बातें

L. K. Advani @ 100th Year Rajasthan Connection: भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी आज रविवार 8 नवंबर 2026 को अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। देश की राजनीति के इस 'शिखर पुरुष' का राजस्थान से बेहद गहरा, ऐतिहासिक और दिलचस्प नाता रहा है।
3 min read
• •
Updated: 8 Nov 2026, 12:00 PM IST
lk advani turns 99 enters 100th year historic rajasthan connection RSS jaipur
Lal Krishna Advani- File Pic

देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नीति-निर्धारक रहे लालकृष्ण आडवाणी ने आज अपने जीवन का एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। वह 99 वर्ष पूरे कर 100वें साल में कदम रख चुके हैं। यूं तो आडवाणी जी का जन्म कराची (अब पाकिस्तान) में हुआ था, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि देश के बंटवारे के बाद जब वे भारत आए, तो राजस्थान ही वह पहला राज्य था जिसे उन्होंने अपनी राजनीतिक और सांगठनिक कर्मभूमि चुना।

विभाजन के बाद राजस्थान आए और बने RSS प्रचारक

साल 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, तो 20 वर्षीय युवा लालकृष्ण आडवाणी सिंध (कराची) छोड़कर दिल्ली पहुंचे थे। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उन्हें प्रचारक बनाकर राजस्थान भेज दिया। उन्होंने साल 1947 से 1952 तक राजस्थान के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में संघ को मजबूत करने का काम किया। वे अलवर, भरतपुर, कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में साइकिल से घूम-घूमकर शाखाएं लगाया करते थे।

जयपुर का 'चौड़ा रास्ता' और नानाजी की हवेली का किस्सा

लालकृष्ण आडवाणी के जीवन का एक दिलचस्प और अनसुना किस्सा जयपुर के प्रसिद्ध चौड़ा रास्ता बाजार से जुड़ा हुआ है। दरअसल, जनसंघ (जो बाद में बीजेपी बना) के शुरुआती दिनों में आडवाणी ने जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित 'नानाजी की हवेली' में करीब 10 साल गुजारे थे।

उस दौर के पुराने जयपुरवासी बताते हैं कि आडवाणी साधारण तरीके से रहते थे। वे धोती-कुर्ता पहनकर हाथ में एक थैला टांगे जयपुर की गलियों में साइकिल पर घूमा करते थे। चौड़ा रास्ता की चाय और नमकीन की दुकानों पर बैठकर वे स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ घंटों राजनीतिक चर्चाएं करते थे।

लालकृष्ण आडवाणी - File Pic

राजस्थान से ही तय हुआ 'अटल-आडवाणी' की जोड़ी का सफर

इसी राजस्थान की धरती ने भारतीय राजनीति की सबसे प्रसिद्ध 'अटल-आडवाणी' की जोड़ी को मजबूत करने की नींव रखी थी। जब 1950 के दशक में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की, तो राजस्थान में काम कर रहे आडवाणी के प्रबंधन कौशल को देखते हुए ही उन्हें बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ सहयोग करने के लिए दिल्ली भेजा गया।

राजस्थान के कार्यकर्ताओं के साथ उनका यह जुड़ाव हमेशा बना रहा और वे जब भी बड़े नेता बनने के बाद जयपुर आते, तो पुराने कार्यकर्ताओं को नाम से पुकारा करते थे।

रथ यात्रा का राजस्थान कनेक्शन

साल 1990 में जब लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए ऐतिहासिक 'राम रथ यात्रा' शुरू की थी, तब राजस्थान में उसकी अभूतपूर्व तैयारी की गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में राजस्थान में आडवाणी जी का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत हुआ था। इस यात्रा ने न केवल देश की राजनीति बदली, बल्कि राजस्थान में भी भाजपा को हमेशा के लिए एक मजबूत शक्ति बना दिया।

राष्ट्र सेवा की प्रतिबद्धता सदैव प्रेरित करती रहेगी: सीएम भजनलाल

भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी के शतायु होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी बधाई सन्देश के ज़रिये अपनी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पोस्ट पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आडवाणी पर लिखे विशेष आलेख का ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा, ''भारत रत्न श्रद्धेय लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लिखा गया आलेख उनके प्रेरणादायी जीवन, राष्ट्र एवं संगठन के प्रति समर्पण और भारतीय राजनीति में उनके अतुलनीय योगदान को भावपूर्ण रूप से प्रस्तुत करता है। श्रद्धेय आडवाणी जी का अनुभव, मार्गदर्शन और राष्ट्र सेवा की प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। माननीय प्रधानमंत्री के इस विशेष आलेख को अवश्य पढ़ें।''

Updated on:
8 Nov 2026, 12:00 PM IST
Published on: