
जयपुर। देश भर में चुनावी सीजन के दौर में विभिन्न राजनीतिक दल मतदाताओं से सपर्क करने के लिए एक-एक घर छान रहे हैं। लेकिन देश में सिक्किम विधानसभा की एक सीट ऐसी भी है, जिसका न कोई नक्शा है और न कोई सीमा। ये बात हो रही है ‘संघ’ की।
यह सामान्य तौर पर राजनीति में प्रचलित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं बल्कि पूरे सिक्किम में फैले बौद्ध भिक्षुओं का संघ है। इस संघ को सिक्किम विधानसभा में पूरी एक सीट का दर्जा प्राप्त है। इस सीट को विशेष तौर पर केवल बौद्ध भिक्षुओं के लिए आरक्षित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि सिक्किम में लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी 11 अप्रेल को मतदान के पहले ही चरण में सपन्न हो गए हैं। इस सीट पर सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रत्याशी शेरिंग लामा कहते हैं कि भिक्षुओं की ओर से अपना प्रतिनिधि चुनने की परंपरा 1640 से चली आ रही है। उस वक्त छोगियाल राजवंश का शासन था। राजा के मंत्रिमंडल में सामान्य नागरिकों के अलावा लामाओं का भी प्रतिनिधित्व होता था।
संघ की विशेष पहचान संरक्षित
संघ की विशेष पहचान को संरक्षित करते के लिए यहां सिर्फ बौद्ध भिक्षु ही चुनाव लड़ते हैं। वोटर के तौर पर 51 मठों के भिक्षु रजिस्टर्ड हैं। गत चुनाव सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के सोनल लामा 126 वोटों से जीत कर विधायक बने थे।
3293 वोटर हैं रजिस्टर्ड
विधानसभा चुनाव के दौरान संघ सीट पर मतदान के लिए 51 बूथों पर एक अलग ईवीएम रखी गई थी। पूरे प्रदेश में इस सीट के पंजीकृत मतदाता इनमें से किसी भी बूथ पर जाकर वोट दे सकते हैं। सीट पर कुल 3293 भिक्षु मतदाता हैं।