
जयपुर. मां दुर्गाजी की आठवीं शक्ति महागौरी के रूप में जानी जाती हैं जिनकी नवरात्र के आठवें दिन उपासना करते हैं। मां महागौरी अमोघ फलदायिनी हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार भक्ति भाव से पूजा करने पर मां महागौरी महिलाओं के सुहाग की रक्षा करती हैं। कुंवारी कन्याओं को योग्य वर मिलता है और पुरुषों को सुुख मिलता है।
मान्यता है कि शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या से वे ओजपूर्ण हो गई। उनका रंग चांदनी के समान सफेद और कुन्द के फूल के समान धवल हो गया। ऐसे में प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें गौरी कहा। उस समय वे मात्र 8 वर्ष की थीं। यही कारण है कि उनकी पूजा नवरात्र के 8वें दिन की जाती है। मां महागौरी का वाहन बैल और सिंह हैं।
मां महागौरी को सफेद रंग बहुत पसंद हैं। इनके सभी वस्त्र यहां तक कि आभूषण भी सफेद हैं। हालांकि उनकी पूजा करते समय गुलाबी रंग के कपड़े पहनना उत्तम माना गया है। दरअसल मां गौरी दांपत्य प्रेम की देवी हैं और गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक है। माता महागौरी की पूजा करते समय पीले या सफेद वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। अष्टमी पर कन्या भोज का विशेष महत्व है।
माता को हल्दी, कुमकुम, अक्षत आदि के साथ लाल चूड़ियां व परिधान अर्पित करें। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेेंद्र नागर के अनुसार माता को पीले फूल अर्पित करना चाहिए। मध्य रात्रि में महा अष्टमी की पूजा करने से श्रेष्ठ फल मिलते हैं। विधिविधान से पूजा कर महागौरी को हलवा का भोग लगाएं। माता को काले चने प्रिय हैं इसलिए चने या इससे बने खाद्य पदार्थ का प्रसाद अर्पित कर वितरित करना चाहिए.
श्लोक
1.
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा
2.
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
3.
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
4.
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
5.
सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।