
जयपुर। पर्यावरण के लिए खतरा बनीं पोलीथिन को रोकने के लिए अब जयपुर समेत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में प्रमुख बाजारों में कपड़े के बैग उगलने वाली मशीन नजर आएंगी। एटीएम जैसी मशीन में पांच रुपए का सिक्का डालने पर कपड़े के दो बैग निकलेंगे, जिनमें लोग खरीदा गया सामान रखकर घर ले जा सकेंगे।
जयपुर, कोटा और अजमेर में मशीनों का ट्रॉयल सफल होने के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जयपुर में तीन, अन्य बड़े शहरों में दो और हर जिला मुख्यालय पर इस तरह की एक मशीन लगाने का निर्णय किया है।
1 लाख की मशीन, बैग खत्म होते ही सायरन
मंडल के चीफ एनवॉयरमेंटल इंजीनियर डॉ. वी.के.सिंघल का कहना है किकरीब एक लाख रुपए कीमत की मशीन में करीब 70 बैग रख सकते हैं।बैग खत्म होने पर सायरन बज जाता है। मशीन फिलहाल प्रमुख बाजार में किसी दुकानदार के यहां रखी जाएंगी। बिजली का खर्च उसको देना होगा और प्रति बैग उसको कुछ लाभ भी हो सकेगा। बैग बनाने का काम महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया जा रहा है।
वहीं पाली, बालोतरा, जासोल जैसी प्रदेशभर की कपड़ा फैक्ट्रियों का वेस्ट कपड़ा बैग बनाने के काम में लिया जाएगा। प्रदेश में प्रतिबंध के बावजूद विकल्प नहीं होने से लोग धड़ल्ले से पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हंै। मंडल ने मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सब मिलकर पहले करें तो अच्छे नतीजे
मंडल सूत्रों का कहना है कि उनका सीमित दायरा है, लेकिन नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिकाएं, जेडीए, मेट्रो, स्मार्ट सिटी योजना, सब्जी व फल मंडी एसोसिएशन, राजस्थान रोडवेज प्रशासन भी यदि इस तरह की मशीन स्थापित करें तो पॉलीथिन की समस्या समाप्त हो सकती है। सीएसआर गतिविधियों में भी इसे शामिल किया जा सकता है।
- कपड़े के बैग आपूर्ति की 45 मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू की है। इन्हें प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया जाएगा।
के.सी.ए.अरूण प्रसाद, सचिव, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल