
जयपुर
मदरसा बोर्ड को स्वायत्ता देने वाले प्रस्तावित बिल का विरोध अब बढ़ता जा रहा है। मदरसा बोर्ड को स्वायत्ता देने के लिए सरकार की ओर से विधानसभा के मानसून सत्र में लाए जाने वाले प्रस्तावित बिल का मुस्लिम संगठनों ने विरोध करते हुए कहा है कि सरकार इस बिल के जरिए हमारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।
विरोध में एक बड़ा जनांदोलन छेडेंगे
जमीयत उलेमा हिंद, मुस्लिम महासभा और मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि मदरसे हमारी धार्मिक आवश्यकता हैं और अपनी पंसद के हिसाब से शिक्षा लेना हमारा संवैधानिक अधिकार है। जमीयत के महासचिव मौलाना वाहिद खत्री का कहना है कि सरकार बच्चों को मदरसा शिक्षा देने में फेल हुई है और अब इस बिल के जरिए मदरसों की स्वायत्ता छीनना चाहती है, उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में इस बिल का समर्थन नहीं करेंगे और इसके विरोध में एक बड़ा जनांदोलन छेडेंगे।
पैरीटीचरों की सुध लेनी चाहिए
वहीं मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ के संरक्षक अमीन कायमखानी का कहना है कि मदरसा बोर्ड को स्वायत्ता देने की बजाए सरकार को मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों और वहां पढ़ने वाले पैरीटीचरों की सुध लेनी चाहिए, पैराटीचर 4100 रुपए मानदेय में काम रहा है। खास बात यह है कि एक ओर मुस्लिम संगठन मदरसा बोर्ड एक्ट का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर राजस्थान मदरसा बोर्ड के सदस्य इस बिल को मदरसों के लिए बेहतर बता रहे हैं।
मदरसा बोर्ड बनेगा ताकतवर
जो लोग सरकार के इस बिल का विरोध कर रहे हैं उन्हें चाहिये कि इस बिल को समझें और यदि कोई सुझाव हो तो हमें बतायें। मदरसों की शुरूआत हुए सालों बीत गये लेकिन आज तक इसका कोई कानून ही नहीं बन पाया। यह बिल आने के बाद मदरसा बोर्ड ताकतवर बनेगा और खुद की स्कीमें खुद बना सकेगा। वैसे भी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों के मदरसा बोर्ड एक्ट बना हुआ है।
उस्मान चौहान
सदस्य, राजस्थान मदरसा बोर्ड