Maharani College Mazar Controversy: जयपुर के महारानी कॉलेज में मजार विवाद के बीच बड़ा खुलासा हुआ है। कुलगुरु के हस्तक्षेप के बाद जेडीए और नगर निगम के नाम दर्ज नामांतरण को निरस्त कर दिया गया। अब महाराजा और महारानी कॉलेज फिर से राजस्थान विश्वविद्यालय के अधीन कर दिए गए हैं।
Rajasthan University Land Dispute Maharaja and Maharani College: जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय के महाराजा और महारानी महाविद्यालयों की भूमि को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा फैसला सामने आया है। तकनीकी त्रुटि के कारण जेडीए और नगर निगम के नाम दर्ज की गई भूमि को अब जिला कलक्टर न्यायालय ने पुनः विश्वविद्यालय के स्वामित्व में करने के आदेश दिए।
इसके बाद तहसील जयपुर ने ग्राम किशनपोल की खसरा संख्या 49 और 50 से संबंधित भूमि का स्वामित्व फिर से विश्वविद्यालय के नाम दर्ज कर दिया है। महारानी कॉलेज की 29 बीघा 17 बिस्वा और महाराजा की 48 बीघा 10 बिस्वा यानी कुल 78 बीघा 07 बिस्वा भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2015 में विश्वविद्यालय के नाम दर्ज किया गया था।
यह मामला हाल ही में राजस्थान विधानसभा में भी उठा था। विश्वविद्यालय के पेंशनर्स, शिक्षकों, पूर्व विद्यार्थियों और छात्रों ने इसके लिए विरोध प्रदर्शन किया था।
दरअसल, महारानी कॉलेज में पिछले वर्ष मजार विवाद हुआ। इस पर महारानी कॉलेज के राजस्व रिकॉर्ड को जांचा गया। इस पर महारानी कॉलेज की जमीन का स्वामित्व नगर निगम के पास मिला।
कुलगुरु अल्पना कटेजा ने बताया कि इससे पूरा प्रकरण सामने आया कि मई 2025 से महाराजा-महारानी कॉलेज की जमीन जेडीए और नगर-निगम के नाम दर्ज है। कार्रवाई करते हुए जुलाई में ही कलक्टर के यहां अपील दर्ज की गई। इसी के साथ विश्वविद्यालय के नाम जमीन के विश्वविद्यालय संपत्ति सुरक्षा की मांग की।
राजस्थान विश्वविद्यालय की सिंडिकेट और सीनेट की बैठक में भी महाराजा और महारानी महाविद्यालय की भूमि के गलत नामांतरण का मुद्दा भी उठा। कुलगुरु ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर सुधार की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था।
इसके अलावा इसके अलावा सीनेट बैठक में भी महाराजा और महारानी कॉलेज की भूमि के गलत नामांतरण के मामले में त्वरित कार्रवाई की जानकारी भी दी गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी संपत्ति और विरासत की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी जीत हुई।
-अल्पना कटेजा, कुलगुरु राजस्थान विश्वविद्यालय