जयपुर। जगतपुरा में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज और क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर बनेगा। इसे लेकर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सोमवार को आइआइटी जोधपुर और एमएनआइटी जयपुर के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने बताया कि एमओयू केे तहत मंडल की ओर […]
जयपुर। जगतपुरा में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज और क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर बनेगा। इसे लेकर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सोमवार को आइआइटी जोधपुर और एमएनआइटी जयपुर के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने बताया कि एमओयू केे तहत मंडल की ओर से आइआइटी, जोधपुर के साथ ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज’ व एमएनआइटी, जयपुर के साथ मिलकर ‘क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना की जाएगी। राज्य बजट की घोषणा के अनुपालन में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज’ एवं ‘क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना की जा रही है। सेंटर्स के लिए मंडल की ओर से जगतपुरा में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, इसलिए तब तक यह सेंटर्स एमओयू किए जा रहे संस्थानों के परिसर में संचालित होंगें।
चंद्रवाल ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और सतत आर्थिक विकास को एक साथ सशक्त करने की दिशा में ‘क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना का प्रस्ताव किया है। यह सेंटर 250 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किया जाएगा। इन सेंटर्स के माध्यम से ग्रीन स्किलिंग (हरित कौशल विकास) को प्राथमिकता, अपशिष्ट को संसाधन के रूप में विकसित करना, सर्कुलर इकॉनॉमी को बढ़ावा देना, प्रदूषण नियंत्रण के लिए रिसर्च सेंटर, आमजन, विद्यार्थियों आदि के लिए डेटा एवं नॉलेज हब विकसित किए जाएंगें। ।
मंडल की ओर से 150 करोड़ रुपए की लागत से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य को जलवायु परिवर्तन से संबंधित अनुसंधान, नीति सलाह, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। यह केन्द्र नीति एवं तकनीकी परामर्श प्रदान करने, राजस्थान का विस्तृत जलवायु मानचित्रण तैयार करने, अर्ली वार्निंग सिस्टम और जलवायु अनुकूलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को संपादित करेगा।