जयपुर

Rajasthan Election 2018: मानवेन्द्र सिंह की राहुल गांधी से नजदीकी, राजस्थान कांग्रेस नेताओं पर भारी!

Rajasthan Assembly Election 2018: मानवेन्द्र सिंह की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से नजदीकी के चलते प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता ज्यादा खुश नहीं हैं!
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Oct 18, 2018
manvendra singh

सुनील सिंह सिसोदिया/नई दिल्ली/जयपुर/ मानवेन्द्र सिंह की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से नजदीकी के चलते प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता ज्यादा खुश नहीं हैं! नेताओं में अंदर खाने यही डर है कि राहुल से नजदीकी होने से अब हर मामले में उनकी बात सीधी होगी।

मानवेन्द्र, उनकी पत्नी चित्रा सिंह और छोटे भाई ने कांग्रेस की सदस्यता राहुल के घर ग्रहण की, जिसमें प्रदेश के आधा दर्जन वरिष्ठ नेता ही मौजूद थे। कांग्रेस में आने की शर्त को लेकर मानवेन्द्र ने स्पष्ट कहा है कि राहुल और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट से उनके पुराने संबंध हैं। कांग्रेस में बिना किसी शर्त आए हैं। वैसे उन्हें जानने वाले यह भी जानते हैं कि सौदा करना उनकी आदत नहीं है।

पश्चिमी राजस्थान में मानवेन्द्र के पिता जसवंत सिंह का भाजपा में सबसे बड़ा नाम है जबकि कांग्रेस में पश्चिमी राजस्थान में अभी सबसे बड़ा नाम अशोक गहलोत का है। मानवेन्द्र बाड़मेर से ताल्लुक रखते हैं। यहां कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद हरीश चौधरी की दावेदारी रही है।

नजदीकी सूत्रों के मुताबिक मानवेन्द्र के कांग्रेस में आने की खबरों के बाद से हरीश चौधरी ने नाराजगी जाहिर की थी। लेकिन उन्हें राहुल गांधी की ओर से हर हाल में कांग्रेस में शामिल किए जाने की जानकारी वरिष्ठ नेताओं ने दी और नाराजगी जाहिर करने के बजाय खुशी से स्वागत करने की बात कही थी। इसी के बाद चौधरी ने मीडिया में मानवेन्द्र के कांग्रेस में स्वागत के लिए कहा था।

अब जब मानवेन्द्र कांग्रेस में आ गए हैं, तो बड़े नेता उनके स्वागत की बात तो कर रहे हैं। लेकिन एकाध नेता को छोड़ ज्यादातर खुश नहीं हैं। वजह है कि मानवेन्द्र का कद उनके पिता के केद्र में लंबे समय तक मंत्री रहने से पहले से ही बड़ा है। सीधे राहुल से संपर्क होने से मानवेन्द्र का कद कांग्रेस में और बढ़ेगा तो नुकसान दूसरे नेताओं को ही होगा।


मालूम हो, मुख्यमंत्री वसुंधराराजे और पूर्व विदेश मंत्री जसवंतसिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में आमने-सामने हो गए थे। जसवंतसिंह ने बाड़मेर-जैसलमेर से टिकट मांगा लेकिन टिकट नहीं दिया। जसवंतसिंह के बागी होकर निर्दलीय ताल ठोकने के बाद राजे ने भी खुलकर लड़ाई का ऐलान कर दिया था। चुनाव बाद जसवंतसिंह बीमार हो गए। मानवेन्द्र तब शिव के विधायक बन चुके थे।

मानवेन्द्र ने अपनी और परिवार की नाराजगी को भाजपा में हर स्तर पर बताया लेकिन बकौल मानवेन्द्र उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसी 22 सितंबर को मानवेन्द्र ने पचपदरा में स्वाभिमान रैली बुलाकर कमल का फूल मेरी भूल कहते हुए भाजपा से नाता तोड़ दिया था। मानवेन्द्र मारवाड़ में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बड़ा कद मानते हैं। उनका नेतृत्व भी स्वीकार करते हैं। वहीं प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को मित्र बताते हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव में अपने पसंद के प्रत्याशियों के साथ लोकसभा चुनाव पर भी नजरें गड़ाए हैं।


स्वाभिमान रैली में कई राजपूत नेता हुए थे शामिल
पचपदरा में पिछले माह हुई उनकी स्वाभिमान रैली में उनके साथ जैसलमेर, जालोर, झुंझुनूं, नागौर, जोधपुर और जयपुर के कई राजपूत नेता शामिल हुए थे। इसके अलावा बाड़मेर के ऐसे चेहरे जो अन्य जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं वह भी मानवेन्द्र की उस रैली में साथ थे।

Published on:
18 Oct 2018 07:10 am