राजस्थान में भीषण गर्मी के कारण अनेक सरकारी और निजी दवा वितरण केंद्रों पर दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए तापमान नियंत्रण की समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे दवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है और वे बेअसर हो सकती हैं।
राजस्थान राज्य में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। ऐसे में यह चिंता का विषय है कि अनेक सरकारी और निजी दवा वितरण केंद्रों पर दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए तापमान नियंत्रण की समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे दवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है और वे बेअसर हो सकती हैं।
हाल में किए गए निरीक्षण में यह सामने आया है कि कई दवा दुकानों पर भंडारण के लिए निर्धारित 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए नहीं रखा जा रहा है। दवाओं को ऐसे ही गर्म वातावरण में खुले में रखा जा रहा है, जिससे उनका असर कम हो सकता है। गुणवत्ता की नहीं होती जांच: दवा स्टोर पर पहुंचने के बाद उनकी गुणवत्ता की कोई जांच नहीं की जाती। ये दवाएं सीधे मरीजों को दे दी जाती हैं। मरीज को यह पता भी नहीं चलता कि बीमारी ठीक न होने का कारण दवा की प्रभावहीनता है।
राज्य में दवा दुकानों का निरीक्षण और मानक अनुसार भंडारण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी औषधि नियंत्रण संगठन की है। इस संगठन की ओर से इस विषय पर कोई ठोस निगरानी नहीं की जा रही है।
कुछ विशेष दवाओं के रासायनिक घटक अत्यधिक गर्मी या ठंड में बदल सकते हैं। जैसे हार्मोन युक्त दवाएं (बर्थ कंट्रोल पिल्स) कीमोथैरेपी की दवाएं मिर्गी (एपिलेप्सी) की दवाएं एंटीबायोटिक्स रक्त ग्लूकोज स्ट्रिप्स अगर नमी में आ जाएं तो गलत रीडिंग दे सकती हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों को गलत दवा या डोज मिल सकती है। इसलिए बाथरूम जैसी नम जगह पर दवा रखने से बचना चाहिए।
अत्यधिक गर्म/ठंडी जगहों पर दवाएं न रखें।
इंसुलिन, एक प्रोटीन आधारित दवा है, जमने पर यह अस्थिर हो सकती है।
जम चुकी दवा अब असरदार है या नहीं, इसे जांचने का कोई आसान तरीका नहीं होता।
कुछ दवाओं को फ्रिज में रखना जरूरी होता है, अगर संदेह हो, तो अपने फार्मासिस्ट से सलाह लें।
दवाएं ऐसी जगह रखें जहां तापमान नियंत्रित हो।
बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें
डॉक्टरी दवाओं के लिए उपयुक्त स्थान
ड्रेसिंग टेबल की दराज
रसोई में स्टोव या सिंक से दूर की अलमारी
कोठरी में स्टोरेज बॉक्स
यात्रा के दौरान दवाएं अपने पास रखें
कार की डिक्की में न रखें, बल्कि इसे केबिन में ही रखें
अधिकतर दवाओं को 25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडी, सूखी जगह, सूरज की रोशनी से दूर रखना चाहिए।
दिल की दवा या अस्थमा इनहेलर जैसी जीवनरक्षक दवाओं पर तापमान का असर खतरनाक हो सकता है।