जयपुर

IMD Alert: राजस्थान के 4 जिलों के लिए मौसम विभाग का Yellow Alert, प्री-मानसून करा सकता है झमाझम बारिश

IMD Alert: राजस्थान में अब सिर्फ मानसून का इंतजार है, इस बीच मौसम विभाग ने 4 जिलों के लिए तात्कालिक चेतावनी जारी की है। इसमें बूंदी, बारां, कोटा और झालावाड़ जिले शामिल हैं, जहां बारिश की चेतावनी दी गई है।
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Jun 12, 2025
Rain
बारिश प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-पत्रिका)

IMD Alert: जयपुर। मौसम विभाग जयपुर ने बूंदी, बारां, कोटा और झालावाड़ जिले के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन जिलों में 12 जून की रात को हल्की बारिश हो सकती है। IMD ने अपने अनुमान में बताया है कि इन जिलों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से तेज सतही हवा चल सकती है। इस दौरान मेघ गर्जना के साथ हल्की बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग ने आमजन से मेघ गर्जन के समय सुरक्षित स्थान में शरण लेने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने कहा कि बिजली कड़कने के दौरान अपने घरों से इलेक्ट्रिक प्लग निकाल दें और मौसम सामान्य होने की प्रतीक्षा करें।

श्रीगंगानगर में सबसे अधिक तापमान

दरअसल, पिछले सप्ताह से लगभग पूरा राजस्थान हीटवेव की चपेट में है। 12 जून को श्रीगंगानगर में सबसे अधिक 48 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ है। राज्य में सबसे कम तापमान प्रतापगढ़ जिले में 32.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है।

14 जून को इन जिलों में बारिश के आसार

मौसम विभाग के मुताबिक, 14 और 15 जून को कोटा, भरतपुर और उदयपुर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं जोधपुर और बीकानेर संभाग में 15 जून को दोपहर के बाद से मेघगर्जन, आंधी और हल्की बारिश होने की संभावना है।

17-20 जून के दौरान शुरू हो सकता है बारिश का दौर

मौसम विभाग ने 11 जून को बताया है कि प्रदेश में 17-20 जून के बाद मेघ गर्जन और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। मानसून अभी राजस्थान से दूर है, लेकिन उसका असर अब जल्द ही प्रदेश में दिख सकता है।

महाराष्ट्र में फंसा मानसून

IMD के मुताबिक, 20 जून तक मानसून के राजस्थान में दस्तक देने की उम्मीद है। लेकिन पिछले करीब 15 दिनों मानसून अभी महारष्ट्र में फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी से नई हवा प्रेशर नहीं बना रही है, ऐसे में मानसून महारष्ट्र से आगे नहीं बढ़ रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने बताया है कि राजस्थान के भीतर 17-20 जून के दौरान मेघगर्जन और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हो सकती है।