पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों की गूंज मरुधरा में काम कर रहे लाखों प्रवासियों के चेहरों पर साफ देखी जा सकती है। यह हलचल केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने राजस्थान के व्यापार, परिवहन और आम जनजीवन को भी गहराई से प्रभावित किया है। 'पत्रिका पड़ताल' में सामने आया है कि किस तरह वोट की चोट का डर और सरकारी योजनाओं का मोह राजस्थान से बंगाल तक के सफर को मजबूर कर रहा है।
सुनील सिंह सिसोदिया/ जयपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भले ही राजस्थान से करीब दो हजार किलोमीटर दूर हो रहे हों, लेकिन इसका असर राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के लोगों पर साफ दिखने लगा है। वोट के लिए घर लौटने का दबाव, वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर और मुफ्त योजनाओं का आकर्षण, इन कारणों से लोगों की दिनचर्या बदल गई है।
सूत्रों के अनुसार, गांवों से लगातार संदेश मिल रहे हैं कि मतदान नहीं किया तो वोटर सूची से नाम हटाया जा सकता है और सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर सरपंच और प्रधानों के जरिए निगरानी की बात भी सामने आ रही है। इसी कारण जयपुर में काम कर रहे लोग हर हाल में मतदान के लिए घर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
मानसरोवर निवासी सुकांत के अनुसार, गांवों से साफ संदेश मिल रहे हैं कि वोट देना जरूरी है, वरना योजनाओं का लाभ बंद हो सकता है। परिवारों पर स्थानीय नेताओं का दबाव भी बताया जा रहा है।
जयपुर से गुवाहाटी और कटक जाने वाली ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। सामान्य किराया चार-पांच गुना तक बढ़ गया है, फिर भी सीटें उपलब्ध नहीं हैं।
बसों का भी यही हाल है। जहां आमतौर पर किराया करीब 2 हजार रुपये था, वहीं अब 4 से 5 हजार रुपये देने के बाद भी सीट नहीं मिल रही। निजी बसों में बुकिंग तेज है और 30-36 सीट वाली बसों में 70 से अधिक यात्रियों को बैठाने की बात पहले ही बता दी जा रही है, जिससे बाद में कोई विवाद न हो।
जयपुर सहित प्रदेशभर में फैक्ट्रियों, शोरूम, होटलों और घरों में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के लोग कार्यरत हैं। एक साथ बड़ी संख्या में इनके छुट्टी पर जाने से कई छोटे उद्योगों में काम ठप पड़ने की स्थिति बन रही है।
वहीं, घरेलू सहायकों की 15-20 दिन की छुट्टी मांगने से परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।
मतदान के बाद अधिकतर लोग परिणाम आने से पहले लौटना चाहते हैं। इसकी वजह परिणाम के बाद संभावित तनाव और हिंसा का डर है।
कई लोगों का कहना है कि अगर समय पर नहीं लौटे तो महीनों तक फंसने की आशंका रहती है। कई लोगों को जाने का टिकट मिल रहा है, लेकिन लौटने का नहीं, जिससे वे बच्चों को यहीं छोड़कर जाने को मजबूर हैं। इसी कारण वे जल्दी से जल्दी वापस लौटना चाहते हैं।