
राजस्थान का मीना बनाम मीणा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्र सरकार ने मीना-मीणा को एक मानने से इंकार कर दिया है। राज्यसभा में सांसद किरोड़ी लाल मीणा के सवाल पर केंद्रीय जनजाति कार्य राज्य मंत्री बिश्वेशर टुडू ने यह जवाब पेश किया है।
अतारांकित प्रश्न संख्या 1734 का उत्तर दिनांक 16 मार्च 2022 को बिश्वेशर टुडू ने दिया था। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) अधिनियम 1976 (1976 का अधिनियम संख्या 108) के तहत भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत राजस्थान राज्य की अनुसूचित जनजाति सूची में MINA समुदाय को क्रम संख्या 9 पर सूचीबद्ध किया गया है। इस आदेश के हिंदी संस्करण में MINA का अनुवाद मीना के रूप में किया गया था। तथापि मीणा (MEENA) समुदाय राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल नहीं है। राजस्थान सरकार को सूचित कर दिया है कि अगर उन्हें राजस्थान की अनुसूचित जाति की सूची में संशोधन करना है तो इसके लिए मौजूदा नियमों के तहत मानव जाति विज्ञान अध्ययन के साथ विस्तृत प्रस्ताव भेजें। हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार का प्रस्ताव अभी तक नहीं आया है।
आपको बता दें किरोड़ी लाल मीणा ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा था कि क्या राजस्थान में मीणा-मीना एक ही जाति है। इस संबंध में 2015 से राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजे गए पत्रों के ब्योरे सहित केंद्र सरकार की ओर से राज्य को भेजे स्पष्टीकरण क्या हैं ? किरोड़ी ने पूछा कि क्या राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण जारी करने का अनुरोध किया है तो केंद्र सरकार कब तक आवश्यक संशोधन करने का विचार रखती है ?
यह था विवाद
2013 में एक आरटीआई के जवाब में केंद्रीय जनजाति मंत्रालय ने मीणा जाति को एसटी मानने से इनकार करते हुए मीना जाति को एसटी बताया था। 2014 में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ ने एक याचिका पर आदेश दिया, जिसमें मीणा जाति को एसटी का कोई लाभ न देने और मुख्य सचिव को आदेश की पालना को कहा गया था। सरकार ने हाईकोर्ट में पेश जवाब में बताया कि मीणा और मीना नाम एक ही जाति के हैं सिर्फ बोली के फर्क के कारण मीना को मीणा बोला और लिखा जाने लगा है। इस आदेश के बाद मीणा नाम से जाति प्रमाण-पत्रों को बड़ी संख्या में मीना नाम से बदलवाने का सिलसिला शुरू हो गया था।