जहरीले पौधे मिल्कवीड का करती है सेवनकाले और नारंगी होते हंै इस तितली के पंख
जयपुर।
जीव-जन्तुओं के इस अद्भुत संसार में तितली एक बहुत ही नाजुक जीव है। जो कि फूल-पत्तियों व पौधों पर मंडराती है। फूलों का रस लेती है। आज हम एक ऐसी तितली की बात कर रहे हैं जो कि देखने में तो काफी सुंदर लगती है लेकिन वह जहर को भी पचा लेती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मोनार्क तितली की। जो कि काले-नारंगी पंखों वाली होती है। यह तितली एक जहरीले पौधे (मिल्क वीड) का सेवन करती है। इस जहरीले पौधे के सेवन से यह तितली ज़हरीली हो जाती है और अपने रंग-रूप से संभावित शिकारियों को आगाह कर देती है कि वह ज़हरीली है। लेकिन एक ज़हरीले आहार के प्रति प्रतिरक्षा विकसित करना काफी हैरानी की बात है। बात जीन्स पर टिकी है।
इस दिशा में शोधकर्ताओं ने काफी रिसर्च की और पता लगाया कि वास्तव में मिल्कवीड पौधा कार्डिएक ग्लाइकोसाइड नामक यौगिक का उत्पादन करता है, जो कोशिकाओं के अंदर और बाहर आयनों के उचित प्रवाह को नियंत्रित करने वाले आणविक पंपों को बाधित करता है। इस पौधे का सेवन करने वाली मोनार्क तितली और अन्य जीवों में इन पंपों का ऐसा संस्करण विकसित हुआ है कि इन जीवों पर इस रसायन का गलत असर नहीं पड़ता।
मिल्कवीड खाने वाले विभिन्न जीवों में क्या समानता है, इसे समझने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के जीव विज्ञानी और उनके सहयोगियों ने मोनार्क तितली के आणविक पंप के जीन का मिलान किया। शोधकर्ताओं को तीन उत्परिवर्तन मिले जो इस प्रोटीन पंप के तीन एमीनो एसिड्स को बदल देते हैं। कीट परिवार में इन परिवर्तनों को देखकर टीम ने यह अनुमान लगाया कि ये एमीनो एसिड परिवर्तन किस क्रम में हुए थे। जिसके कारण कीट परिवार इस जहरीले मिल्कवीड को खाने के बाद भी पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं।