
Rajasthan Monsoon Farewell : राजस्थान में मानसून की विदाई का दौर शुरू हो गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून शनिवार को पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ हिस्सों से विदा हो गया। प्रदेश से मानसून की सामान्य विदाई 17 सितंबर से मानी जाती है, लेकिन इस बार 2 दिन की देरी से इसकी वापसी शुरू हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 3-4 दिनों में राजस्थान के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर को दक्षिण-पूर्वी व पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। इनमें कोटा, उदयपुर, अजमेर संभाग के कुछ हिस्से शामिल हैं।
इधर, मानसून की विदाई के बीच दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटे में बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में अति भारी बारिश हुई। जल संसाधन विभाग के अनुसार बांसवाड़ा के घाटोल में 207 मिमी बारिश दर्ज की गई। बांसवाड़ा के भुंगड़ा में 173 मिमी, लोहारीया में 148 मिमी और गढ़ी में 124 मिमी बारिश हुई।
प्रतापगढ़ के पीपलखूंट में 190 मिमी और झालावाड़ के मनोहरथाना में 131 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा डूंगरपुर के गलियाकोट में 101 मिमी और प्रतापगढ़ में 103 मिमी बारिश हुई। बीकानेर के कोलायत में भी 70 मिमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने रविवार को बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर और उदयपुर में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है। दक्षिणी राजस्थान में सक्रिय मौसम तंत्र के प्रभाव से बारिश का दौर बना रह सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को मानसून की वापसी रेखा 27.0°N/68.0°E, रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला और 29.5°N/71.5°E से होकर गुजर रही थी। अगले 3-4 दिनों में राजस्थान के कुछ और हिस्सों के साथ पंजाब व सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।
कोटा के नवनेरा बैराज के कैचमेंट क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और अपस्ट्रीम में स्थित कालीसिंध बांध सहित अन्य सहायक नदियों से पानी की लगातार आवक को देखते हुए जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए बैराज के 9 गेट खोल दिए गए हैं। वर्तमान में बैराज से 1,02,303 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार पानी की आवक की स्थिति को देखते हुए निकासी की मात्रा में और बढ़ोतरी की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर पानी की निकासी 1,50,000 क्यूसेक तक बढ़ाई जा सकती है। बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने को लेकर विभाग ने आमजन को सतर्क रहने की अपील की है।