Farmer Support: किसानों के लिए राहत: 20 मार्च से पंजीकरण, तय दाम पर होगी खरीद। सरसों ₹6200 और चना ₹5875 प्रति क्विंटल, सरकार ने की पूरी तैयारी।
Mustard Procurement: जयपुर। रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में सरसों और चना की फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 1 अप्रैल 2026 से शुरू की जाएगी। इसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया 20 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जिससे किसान समय रहते अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकें।
उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां जयपुर ग्रामीण उदय दीप सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों के अनुसार चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल तथा सरसों का 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इन दरों पर ही किसानों से फसल की खरीद की जाएगी।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जयपुर जिले में कुल 42 खरीद केन्द्र स्थापित किए गए हैं। इन केन्द्रों पर पंजीकृत किसान अपनी उपज बेच सकेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसानों को अपने मोबाइल पर प्राप्त संदेश के अनुसार निर्धारित तिथि पर ही खरीद केन्द्र पर पहुंचना होगा। इससे व्यवस्था सुचारू बनी रहेगी और भीड़-भाड़ से बचाव होगा।
उप रजिस्ट्रार शिरीष वी. चान्दे ने बताया कि किसानों को यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि निर्धारित तिथि से अधिकतम 10 दिनों के भीतर ही उपज की तुलाई करवाई जा सकती है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।
इसके अलावा, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6001 भी जारी किया गया है, जिस पर किसान किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार की इस पहल से प्रदेश के हजारों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। समर्थन मूल्य पर खरीद से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रभाव से भी राहत मिलेगी। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर पंजीकरण कराएं और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें।
सरकार द्वारा सरसों और चना की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करना किसानों के लिए एक सकारात्मक और राहत देने वाला कदम है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा भी मिलेगी। समयबद्ध पंजीकरण और निर्धारित तिथि पर खरीद की व्यवस्था पारदर्शिता और सुव्यवस्था को बढ़ावा देती है। साथ ही, 42 खरीद केन्द्रों की स्थापना से किसानों को दूर-दराज जाने की परेशानी भी कम होगी। यदि इसी तरह योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता रहा, तो किसानों की आर्थिक स्थिति में निश्चित रूप से सुधार होगा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।