देशभर में आज नागपंचमी मनाई जा रही है। सावन के महीने के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जानेवाला त्यौहार नागपंचमी दरअसल नाग को देवता मानकर उसकी पूजा करने का पर्व है। हमारे देश में सांप या नाग को दैवीय शक्तियों वाला जीव माना जाता है और इसी वजह से उसकी पूजा की जाती है।
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Nag Panchmi 2020 Date, Puja Time, Rituals
जयपुर.
देशभर में आज नागपंचमी मनाई जा रही है। सावन के महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जानेवाला त्यौहार नागपंचमी दरअसल नाग को देवता मानकर उसकी पूजा करने का पर्व है। हमारे देश में सांप या नाग को दैवीय शक्तियों वाला जीव माना जाता है और इसी वजह से उसकी पूजा की जाती है। सर्प या नाग आदि हमेशा से ही कौतूहल का विषय भी रहे हैं।
नाग पूजा के पीछे अनेक कारण हैं। कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं तो कुछ व्यवहारिक वजहें भी हैं। देश के उत्तरी और मध्य राज्यों में प्राय: घरों में एक वाक्य दीवारों आदि पर लिखा रहता है— आस्तिक मुनि की आन है...। सर्प भय से बचने के लिए यह वाक्य लिखा जाता है। आमतौर पर जिन घरों में ज्यादा सांप निकलते हैं वहां ऐसा लिख दिया जाता है। इसके पीछे एक कथा है जिसका संबंध भविष्य पुराण में मिलता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार दरअसल आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय के यज्ञ में जलने से नागों की रक्षा की थी। इस पुराण में बताया गया है कि जनमेजय के नाग यज्ञ में जलने से बच जाने पर नागों ने आस्तिक मुनि और राजा जनमेजय से कहा कि जो लोग नागों की पूजा करेंगे, उनके घर में नाग या सर्प दंश का भय नहीं रहेगा। जो लोग आस्तिक मुनि का नाम भी बोलेंगे वे भी सर्पभय से बचे रहेंगे. जो अपने घर के बाहर आस्तिक मुनि का नाम लिखेंगे, उनके घर में सर्पो या नागों आदि का प्रवेश नहीं होगा। इसलिए जहां ज्यादा सांप निकलते हैं उन घरों या स्थानों पर आस्तिक मुनि की आन है... लिख दिया जाता है।