राजस्थान में NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला अब पूरी तरह राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए दावा किया है कि गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल भाजपा का सक्रिय नेता है।
राजस्थान में NEET पेपर लीक की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार रसूखदार गलियारों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस मामले में हुई ताजा गिरफ्तारी ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। कांग्रेस ने सीधा आरोप लगाया है कि पेपर लीक का आरोपी दिनेश बिवाल सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पदाधिकारी है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के एक ट्वीट ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस की जंग में बदल दिया है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दिनेश बिवाल की कुछ तस्वीरें और पोस्टर साझा किए हैं, जिनमें वह भाजपा के झंडे और बड़े नेताओं के साथ नजर आ रहा है।
दिनेश बिवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों और पुलिस जांच के हवाले से दावा किया जा रहा है कि:
पेपर की खरीद: दिनेश ने कथित तौर पर 30 लाख रुपए में नीट का पेपर खरीदा था।
नेटवर्क का विस्तार: पेपर खरीदने के बाद उसने इसे कई व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य अभ्यर्थियों तक पहुँचाया।
मास्टरमाइंड की भूमिका: उसे इस पेपर माफिया नेटवर्क की एक अहम कड़ी माना जा रहा है जो कोचिंग संस्थानों और अभ्यर्थियों के बीच 'पुल' का काम करता था।
कांग्रेस के आरोपों को बल दिनेश बिवाल की उन पुरानी तस्वीरों से मिल रहा है जो अब सोशल मीडिया पर 'आग' की तरह वायरल हैं।
कांग्रेस अब इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि जो भाजपा सरकार पेपर लीक पर 'बुलडोजर' चलाने की बात करती थी, उसके अपने ही आंगन में पेपर माफिया पल रहे हैं।
हालांकि भाजपा की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक बड़ा बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर से यह आवाज उठ रही है कि आरोपी का किसी भी दल से संबंध हो, कानून अपना काम करेगा। अक्सर ऐसे मामलों में पार्टियां आरोपी को अपना सदस्य मानने से इनकार कर देती हैं या पुराना बताकर पल्ला झाड़ लेती हैं।
NEET रद्द होने से 24 लाख छात्र पहले से ही सदमे में हैं, और अब इस पर हो रही 'राजनीति' ने मामले को और उलझा दिया है। अगर दिनेश बिंवाल का भाजपा कनेक्शन सच साबित होता है, तो यह प्रदेश की भजनलाल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। क्या सरकार अपने 'अपनों' पर कठोर कार्रवाई कर पाएगी?