Rishi Biwal 12th Marksheet Viral: नीट पेपर लीक मामले में जयपुर के जमवारामगढ़ से बड़ा खुलासा। आरोपी दिनेश बिवाल ने जिस बेटे ऋषि के लिए नीट का पेपर खरीदा, उसकी 12वीं की मार्कशीट देख उड़ जाएंगे होश। थ्योरी में सिंगल डिजिट नंबर लाने वाला छात्र ग्रेस मार्क्स से हुआ है पास।
Neet Paper Leak Update: नीट (NEET) परीक्षा में सामने आ रहे फर्जीवाड़े और धांधली के बीच एक ऐसा चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने पूरी शिक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। जयपुर के जमवारामगढ़ के रहने वाले दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल को डॉक्टर बनाने के लिए लाखों रुपये देकर नीट का पेपर खरीदा था। लेकिन जब इस 'मुन्नाभाई' की 12वीं (सीनियर सेकेंडरी) की असली मार्कशीट सामने आई, तो जांच अधिकारी भी सिर पकड़कर बैठ गए। मार्कशीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
जो छात्र बोर्ड परीक्षा में फेल होते-होते बचा, वह पेपर लीक माफिया के दम पर देश के टॉप सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट हथियाने की फिराक में था। उल्लेखनीय है कि उसके पांच भाई-बहन पहले ही नीट पास कर चुके हैं। पिछले दो साल में सभी ने परीक्षा पास कर ली थी और अधिकतर राजस्थान के ही सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस की तैयारी कर रहे थे। लेकिन उनमें से अधिकतर ने अब कॉलेज जाना छोड़ दिया है।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा जारी ऋषि बिवाल (रोल नंबर: 2624268) की मार्कशीट बताती है कि वह पढ़ाई में कितना 'होनहार' था। ऋषि ने जयपुर के नटाटा स्थित 'जानकी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल' से परीक्षा दी थी। बोर्ड परीक्षा में उसका कुल स्कोर मात्र 50.80% (254/500 मार्क्स) रहा है। परिणाम में साफ लिखा है— 'Second Division By Grace' यानी द्वितीय श्रेणी, वह भी ग्रेस मार्क्स (कृपांक) के साथ। अनिवार्य हिंदी विषय में तो वह पूरी तरह फेल था, जिसे बोर्ड ने रहम खाकर ग्रेस देकर पास किया।
एक डॉक्टर बनने के लिए छात्र का फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) में मजबूत होना अनिवार्य है, लेकिन ऋषि के नंबर देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। 56 नंबर के मुख्य थ्योरी पेपर में उसके प्राप्तांक इस प्रकार हैं:
* फिजिक्स (Physics): 56 में से मात्र 09 नंबर (सिंगल डिजिट)
* केमिस्ट्री (Chemistry): 56 में से मात्र 15 नंबर
* बायोलॉजी (Biology): 56 में से मात्र 20 नंबर
अगर स्कूल की तरफ से भेजे जाने वाले सत्रांक (सेशनल मार्क्स) और प्रैक्टिकल के 28-29 नंबर नहीं मिलते, तो यह छात्र 12वीं की दहलीज भी पार नहीं कर पाता।
इस मामले का सबसे स्याह पहलू यह है कि यदि समय रहते इस महाघोटाले और पेपर लीक का पर्दाफाश नहीं होता, तो परीक्षा में ऋषि बिवाल के 600 से अधिक (600+) नंबर आ सकते थे और अपने बहन-भाईयों की तरह वह भी डॉक्टर बनने की लाइन में लगने ही वाला था। लीक हुए पेपर को रटकर वह आसानी से किसी भी प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लेता और व्यवस्था की नाक के नीचे एक अयोग्य डॉक्टर तैयार हो जाता। यह खुलासा उन लाखों ईमानदार छात्रों के गाल पर तमाचा है, जो सालों तक दिन-रात एक कर नीट की तैयारी करते हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बिवाल परिवार और पेपर लीक कराने वाले पूरे नेक्सस पर कानूनी शिकंजा कस रही हैं।