जयपुर

भारत से गायब हो गया नेहरू का पहला तिरंगा

कांग्रेस के नेता और नेहरू के नाती राहुल गांधी भले ही सोशल मीडिया के खातों पर अपने नाना और पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की तिरंगे वाले तस्वीर लगाकर छाती चौड़ी कर रहे हों लेकिन देश की आजादी के बाद लालकिले की प्राचीर से फहराया गया पहला तिरंगा गायब है।
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Updated: 5 Aug 2022, 4:17 PM IST
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कांग्रेस(Congress) के नेता और नेहरू के नाती राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भले ही सोशल मीडिया के खातों पर अपने नाना और पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawahar lal Nehru)की तिरंगे वाले तस्वीर लगाकर छाती चौड़ी कर रहे हों लेकिन देश (India) की आजादी के बाद लालकिले (Red Fort) की प्राचीर से फहराया गया पहला तिरंगा गायब है। सोशल मीडिया पर नेहरू तिरंगा (Nehru Flag) वर्सेज मोदी तिरंगा (Modi Flag) की एक बहस छिड़ी दिख रही है, हर तरफ हंगामा सा बरप रहा है लेकिन इस बीच देश का अमूल्य तिरंगा गायब है। राष्ट्रपति भवन से लेकर राष्ट्रीय लेखागार तक कहीं भी उसका धनीधोरी नहीं है।

राष्ट्रपति भवन में भी नहीं है तिरंगा
लालकिले के प्राचीर फहराए गए तिरंगे को लेकर जब तहकीकात की गई तो यह बात सामने आई कि यहां पहला तिरंगा नहीं रखा गया है। राष्ट्रपति के मालखाने में भी 1947 में आजादी के बाद फहराया गया पहला तिरंगा नहीं है। मालखाने में उस समय के तमाम अन्य साक्ष्य तो हैं लेकिन तिरंगे का कोई पता नहीं है। राष्ट्रपति भवन के मीडिया प्रभारी रहे वेणु राजमणि ने बताया कि उस तिरंगे की कोई जानकारी नहीं है। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू द्वारा 1947 में फहराया गया पहला तिरंगा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पास भी नहीं है। यह विभाग ही केंद्र सरकार के आदेश की पालना में गणंतंत्र दिवस हो या फिर स्वतंत्रता दिवस समारोह की पूरी तैयारी करता है।

राष्ट्रीय संग्रहालय और राष्ट्रीय लेखागार में भी नहीं है तिरंगा
राष्ट्रीय लेखागार ऐसी जगह है जहां निर्माण की बात या फिर विध्वंस की। इतिहास को उसी रूप में संजोया जाता है। यहां भी तलाश की गई कि लेकिन यहां भी पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा फहराया गया पहला तिंरगा नहीं है। यहां वह तिरंगा जरूर है जिसे मुंबई में 1946 की ऐतिहासिक नौ सेना विद्रोह के दौरान भारतीय जवानों ने फहराया था। इतिहासकार डा.अनिरुद्ध देशपांडे बताते हैं कि नौसेना विद्रोह से अंग्रेज हिल गए। यहीं से उनकी वापसी भी तय हो गई। राष्ट्रीय संग्रहालय में स्वागत अधिकारी ममता मिश्र ने बताया कि मानव सभ्यता अवशेष, मौर्यकालीन, गांधार, गुप्त और अन्य राजवंशों के दौर के भित्तिचित्र, तामपत्र और दुर्लभ कलाकृतियां तो हैं, पर कोई तिरंगा नहीं है।

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