Newborn Life Support: नवजात देखभाल में नई पहल: ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण। जीवनरक्षक तकनीक पर जोर: नवजातों के लिए ऑक्सीजन उपयोग का नया मॉडल।
Neonatal Oxygen Therapy: जयपुर. जयपुर में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है, जहां “नवजात शिशुओं के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम” पर आधारित राष्ट्रीय पायलट प्रशिक्षण आयोजित किया गया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस दो दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य नवजात देखभाल सेवाओं (Facility-Based Newborn Care - FBNC) को सुदृढ़ करना और ऑक्सीजन थेरेपी के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना है।
यह प्रशिक्षण 4 और 5 मई को जे.के. लोन अस्पताल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर में आयोजित हुआ, जिसमें राज्यभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और जिलों से आए बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में हाइब्रिड लर्निंग मॉडल अपनाया गया, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि नवजातों में ऑक्सीजन थेरेपी का सही उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिक या कम ऑक्सीजन दोनों ही स्थितियां शिशु के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में साक्ष्य-आधारित (evidence-based) प्रोटोकॉल्स के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
प्रशिक्षण में ऑक्सीजन डिलीवरी सिस्टम, पल्स ऑक्सीमेट्री के जरिए मॉनिटरिंग, तथा Continuous Positive Airway Pressure (CPAP) तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि CPAP नवजातों में श्वसन संबंधी समस्याओं के उपचार में अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है और यह कई मामलों में वेंटिलेटर की आवश्यकता को कम कर सकता है।
परियोजना निदेशक (शिशु स्वास्थ्य) डॉ. प्रदीप चौधरी के अनुसार, प्रदेश के 71 स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (SNCU) में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध है, जहां करीब 40 प्रतिशत नवजातों को वेंटिलेटर या CPAP के माध्यम से उपचार दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के जरिए प्राप्त फीडबैक के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण मॉड्यूल को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे पूरे देश में एक समान और प्रभावी नवजात देखभाल प्रणाली विकसित की जा सके।
इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख शिशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। साथ ही प्रतिभागियों को “ट्रेनर” के रूप में तैयार किया गया है, ताकि वे अपने-अपने संस्थानों में अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित कर सकें।
यह पहल न केवल नवजात मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि देश में शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को एक नए स्तर पर ले जाने का प्रयास भी है।