जयपुर

एनजीटी ने राजस्थान सरकार पर लगाया 40 करोड़ का जुर्माना

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने राजस्थान की नदियों में उद्योगों के कारण प्रदूषण पर फिर सख्ती दिखाई है।
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Mar 07, 2019
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जयपुर/नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) ने राजस्थान की नदियों में उद्योगों के कारण प्रदूषण पर फिर सख्ती दिखाई है। एनजीटी ने पहले पाली जिले की बांडी नदी में प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार पर 20 करोड़ और सीईटीपी संचालकों पर एक करोड़ रुपए जुर्माना लगाया था।

अब लूणी नदी को प्रदूषण से बचाने में नाकामी पर राज्य सरकार पर 40 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया है। स्वास्थ्य और कृषि सचिव को आसपास रहने वालों पर इसके असर का पता लगाने को कहा है। एनजीटी ने लूणी नदी में बालोतरा, जसोल व बिठूजा के उद्योगों के प्रदूषण को लेकर आदेश दिया है। जस्टिस आर एस राठौड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश दिया है। 30 करोड़ रुपए एक महीने के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को, बाकी 10 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस गारंटी के तौर एक महीने के अंदर जमा कराने होंगे।

एनजीटी ने 7 जनवरी 19 को बालोतरा, जसोल और बिठूजा के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईपीटी) और हाई रेट ट्रांसपाइरेशन सिस्टम (एचआरटी) सहित प्रदूषण रोकने के अन्य उपायों का निरीक्षण करने के लिए कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने 24 और 25 जनवरी को इलाके का भ्रमण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। कमेटी की रिपोर्ट में कहा है कि उद्योगों के प्रदूषण के कारण लूणी नदी का पानी इस्तेमाल लायक नहीं रह गया है। यह नदी इतनी प्रदूषित है कि इसका पानी सिंचाई लायक भी नहीं है। कमेटी ने पाया कि सीईपीटी मानकों के मुताबिक काम नहीं कर रहा है और उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट सीधे लूणी नदी में जा रहा है। रिपोर्ट में प्लांट के जरिए शुद्ध किए गए पानी को एचआरटीएस यानि तालाब में रखकर उड़ाने की प्रक्रिया को कारगर नहीं माना गया है।

एनजीटी ने राजस्थान के स्वास्थ्य और कृषि सचिव को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर लूणी नदी के पास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य और उनकी खेती को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट सौंपी जाए। राज्य सरकार कमेटी द्वारा सुझाए गए एक्शन प्लान को लागू करें। लूणी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए उसमें जमा हानिकारक औद्योगिक कचरे की सफाई की जाए। एनजीटी ने उन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्दश भी दिया, जहां अनाधिकृत रूप से नदी में औद्योगिक कचरा डाला जा रहा है। एनजीटी ने आमजन के हितों के प्रति चिंता जताते हुए बाड़मेर कलक्टर से भूजल की गुणवत्ता और उसके स्तर के बारे में रिपोर्ट तलब की है, वहीं नदी में प्रदूषण की वजह से इलाके के बोरवेल के पानी को हुए नुकसान का उपाय करने का निर्देश भी दिया।

Published on:
07 Mar 2019 08:11 am