— कोरोना काल को पार लगाने वाली मनरेगा का हाल, प्रमुख सचिव ने दिए पर्याप्त कार्य स्वीकृति के निर्देश
पंकज चतुर्वेदी
जयपुर. कोरोना काल में प्रदेश में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बन कर सामने आई मनरेगा से अब प्रशासन का ध्यान हटता दिख रहा है। राज्य में रविवार को 1342 ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों का आंकड़ा शून्य रहा। यानि इन पंचायतों में एक भी व्यक्ति को रोजगार नहीं मिला।
कुछ ही दिन पहले शून्य कार्यों का यह मामला 2 हजार पंचायतों में सामने आया था। हालांकि, अधिकारी इसे बारिश और खेतीबाड़ी का प्रभाव कह रहे हैं, किन्तु सरकार खुद यह मान रही है कि ऐसा नहीं हो सकता कि इन पंचायतों में कोई मजदूर रोजगार मांगने आया ही नहीं हो। हाल ही एक बैठक में यह खुलासा हुआ तो ग्रामीण विकास की प्रमुख सचिव अपर्णा अरोड़ा ने हर ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों की उपलब्धता तय करने के आदेश दिए हैं।
बाड़मेर, करौली में सर्वाधिक टोटा
जिला— कुल पंचायतें— बिना कार्य वाली पंचायतें
बाड़मेर— 689 — 215
करौली— 243 — 133
जयपुर — 606— 66
जोधपुर— 629 — 98
प्रतापगढ़ — 235— 87
सीकर— 376— 59
एक माह में तीन लाख से ज्यादा मजदूर कम
प्रदेश में मनरेगा के बीते एक माह में ही तीन लाख से अधिक मजदूरों का नियेाजन कम हो गया है। 1 सितंबर को जहां 16 लाख से अधिक मजदूर कार्यरत थे, वहीं 3 अक्टूबर को यह संख्या 12.74 लाख रह गई। जानकारों का कहना है कि मानसून में खेतीबाड़ी का समय होने से ऐसा हुआ। दिसंबर के आसपास यह संख्या फिर बढ़ेगी।
कोरोना में 53 लाख की तारणहार
कोरोना की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन और प्रवासियों के आने के दौरान एक माह मनरेगा ही ऐसी योजना था, जिसने गांवों में रेकॉर्ड रोजगार दिए थे। जून 2020 में योजना के तहत सर्वाधिक 53 लाख लोगों को गांवों में रोजगार दिया गया था। जबकि इस वर्ष जून में यह संख्या महज 20 लाख ही रह गई। कोरोना काल को पार लगाने वाली मनरेगा का हाल