
जयपुर. रेलवे ने महिला डेडिकेटेड कोच में पुरुष यात्रियों के प्रवेश पर जुर्माना तो पांच गुना बढ़ा दिया है, लेकिन महिलाओं के लिए कोच बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रहा। हाल ये है कि उत्तर पश्चिम रेलवे जोन की 72 फीसदी ट्रेनों में अनारक्षित महिला कोच की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में अकेले सफर करने वाली महिलाओं और युवतियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर रात के समय ट्रेन में सफर करने वाली महिलाओं के लिए अलग कोच की कमी चिंता का कारण बनती है। उत्तर पश्चिम रेलवे जोन में कुल 444 ट्रेनें चलती हैं। इनमें 260 मेल-एक्सप्रेस और 184 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। इन सभी ट्रेनों में से केवल 125 में ही अलग महिला कोच की सुविधा उपलब्ध है। यानी कुल ट्रेनों में करीब 28 फीसदी में ही महिलाओं के लिए डेडिकेटेड कोच हैं, जबकि बाकी 72 फीसदी ट्रेनों में यह सुविधा नहीं है।
महिला कोच होने के बावजूद कई जगहों पर पुरुष यात्री इनमें घुस जाते हैं। खासकर छोटे स्टेशनों से ज्यादा घुसपैठ होती है। रेलवे ने महिला कोच में प्रवेश करने पर पुरुषों से जुर्माना 500 रुपए की जगह 2500 रुपए कर दिया है, लेकिन इन कोचों में कार्रवाई नाममात्र ही होती है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि, जिन रूटों पर ज्यादा आवाजाही है। उनमें दौड़ रही अनारक्षित ट्रेनों में महिलाओं के लिए डेडिकेटेड कोच लगा रखे हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। अकेले सफर करने वाली युवती, महिलाओं के लिए आरक्षित श्रेणी में टिकट बुकिंग में अलग से कोटा है। आरपीएफ की ओर से नियमित फीडबैक भी लिया जाता है।
जोन की हर मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में ट्रेन में कम से कम एक डेडिकेटेड महिला कोच की अनिवार्यता की जाए। खासकर उन रूटों पर जरूर हों, जहां ज्यादा महिलाओं की आवाजाही है। साथ ही, स्टेशनों पर चेकिंग स्क्वॉड की नियमित तैनाती हो ताकि अनधिकृत पुरुषों की एंट्री रोकी जा सके।
- यशवंत शर्मा, पूर्व रेल अधिकारी