गेहूं की सरकारी खरीद का पैटर्न अब बदलेगा

राज्य सरकार ने प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद का पैटर्न बदलने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। विक्रेन्द्रीकृत खरीद व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गेहूं की खरीद व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा। यह पैटर्न अगले सीजन से लागू किया जाएगा।
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Updated: 16 Jul 2015, 3:01 AM IST
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राज्य सरकार ने प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद का पैटर्न बदलने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। विक्रेन्द्रीकृत खरीद व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में गेहूं की खरीद व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा। यह पैटर्न अगले सीजन से लागू किया जाएगा।


खाद्य विभाग के उपायुक्त एवं उप शासन सचिव आकाश तोमर की ओर से जारी परिपत्र में कहा है कि प्रदेश में गेहूं की खरीद की विकेन्द्रीकरण व्यवस्था लागू करने के लिए अधिकारियों की संयुक्त टीम का गठन किया गया है। राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में टीम का गठन किया गया है, जो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में संचालित गेहूं की खरीद व्यवस्था का अध्ययन कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा में वर्ष 2016 में गेहूं की सरकारी खरीद प्रणाली विक्रेन्द्रीकरण करने की घोषणा की थी।

अलवर में पायलट प्रोजेक्ट
दो साल पहले अलवर जिले में गेहूं खरीद की विक्रेन्द्रीकरण व्यवस्था लागू करना पायलेट प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इस प्रणाली से गेहूं की खरीद में पारदर्शिता आई है तथा किसानों को गेहूं बेचने में आसानी हुई है। भुगतान भी किसानों के खातों में ही ऑनलाइन जमा किया जाता है। गेहूं की बुवाई के समय ही गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

किसानों से पहले ही गिरदावरी ले ली जाती है। गेहूं उत्पादन का पूर्व में ही आकलन कर खरीद और भण्डारण की व्यवस्था कर ली जाती है। किसान संगठन भी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर गेहूं खरीद का पैटर्न लागू करने की मांग उठा रहे हैं।

यह है वर्तमान व्यवस्था
वर्तमान में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था भारतीय खाद्य निगम के जिम्मे होती है। एफसीआई ही खरीद से लेकर भुगतान व भण्डारण की व्यवस्था करता है। इस व्यवस्था में राज्य सरकार का हस्तक्षेप सीमित होता है। जबकि खरीद केन्द्रों पर अव्यवस्था के कारण सरकार की किरकिरी होती है। इसलिए खरीद पैटर्न बदलने की तैयारी चल रही है।

राज्य सरकार के निर्देशों पर ही मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की गेहूं की खरीद व्यवस्था का अध्ययन किया जा रहा है। प्रदेश में खरीद का नया पैटर्न कैसे लागू किया जा सकेगा, इसकी रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी।
रामचरण मीना, संभागीय उपभोक्ता संरक्षण अधिकारी भरतपुर व अध्ययन दल के सदस्य
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