soil health Rajasthan: क्या खत्म होगी रासायनिक खाद पर निर्भरता? सरकार लाई नई पहल। खेत में ही बनेगी खाद! किसानों के लिए खुलने वाला है नया रास्ता। “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान से मृदा स्वास्थ्य को मिलेगा नया संबल।
Compost Farming: जयपुर. राज्य में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान की शुरुआत की घोषणा की है। यह राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान 06 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित किया जाएगा, जिसमें किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए मृदा की उर्वरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह अभियान किसानों को अपने खेत में उपलब्ध संसाधनों से जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
अभियान के तहत कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, जैव उर्वरक और प्राकृतिक खेती की विधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेष रूप से ढैंचा, ग्वार और चवला जैसी हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस दौरान ग्राम पंचायत स्तर तक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें कृषक गोष्ठियां, रात्रि चौपाल, प्रभात फेरियां और प्रशिक्षण शिविर शामिल होंगे। कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके और आईसीएआर संस्थानों के वैज्ञानिक इन गतिविधियों में भाग लेकर किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक जानकारी देंगे।
| गतिविधियां |
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| ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम |
| कृषक गोष्ठियां और प्रशिक्षण शिविर |
| रात्रि चौपाल और प्रभात फेरियां |
| जैविक खाद निर्माण का प्रदर्शन |
| वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की भागीदारी |
अभियान में प्रगतिशील और नवाचारी किसानों को भी मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि वे अपने अनुभव साझा कर अन्य किसानों को प्रेरित कर सकें। साथ ही “नमो ड्रोन दीदी”, कृषि सखियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
| लाभ |
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| रासायनिक उर्वरकों पर खर्च में कमी |
| मृदा की उर्वरता और गुणवत्ता में सुधार |
| फसल उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि |
| पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा |
| प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग |
किसानों को मृदा परीक्षण और सॉयल हेल्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा। डीएपी और यूरिया के विकल्प के रूप में एसएसपी, एनपीके और टीएसपी जैसे उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी, जिससे मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।