प्रतापगढ़ में अंग मिलने से फिर उठा वन्य जीव संरक्षण पर सवाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 12-15 लाख में बिकता है पेंगोलिन
जयपुर. प्रतापगढ़. राजस्थान के प्रतापगढ़ में दुर्लभ वन्य जीव पेंगोलिया या चींटीखोर के अंग मिलने से एक बार फिर वन्य जीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में वन्यजीव संरक्षित सूची में प्रथम श्रेणी के दुर्लभ वन्यजीव पेंगोलिन (चींटीखोर) के अंग बेचते सरपंच समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया। दरअसल चीन व वियतनाम जैसे कई देशों के होटलों व रेस्तराओं में खाने की लिए इसका मांस बेधडक़ परोसा जाता है। वैश्विक स्तर पर इनके मांस, चमड़ी, शल्क, हड्डियां व अन्य शारीरिक अंगों की अधिक मांग होने से इनका बड़े पैमाने पर शिकार करवाया जाता है तथा राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी भारी मात्रा में तस्करी की जाती है। दूसरी ओर चीन व थाईलैंड जैसे कई देशों में इसके शल्कों का उपयोग यौनवर्धक औषधि व नपुंसकता दूर करने के लिये भी किया जाता है। जबकि आज तक इसका कोई वैज्ञानिक सबूत उपलब्ध नहीं है। एक अनुमान यह भी है कि अन्तरराष्ट्रीय बाजार में इस वन्य जीव की कीमत 12 से 15 लाख रुपये तक आंकी गई है। भारत में लगभग बीस से तीस हजार रुपये में इसे बेचा व खरीदा जाता है।
सरपंच समेत दो गिरफ्तार, आरोपी इंटरनेट पर खोज रहे थे ग्राहक
प्रतापगढ़. प्रतापगढ़ में वन विभाग ने कार्रवाई इंटरनेट के माध्यम से खुद ग्राहक बनकर की। जिले में पेंगोलिन का शिकार कर अंग बेचने का यह पहला मामला है। स्पेशल टीम को इंटरनेट के माध्यम से जानकारी मिली थी कि पेंगोलिन के अंग बेचने के लिए ग्राहक ढूंढा जा रहा है। इस पर टीम ने फर्जी ग्राहक बनकर तस्करों तक पहुंच बनाई। इस गिरोह के देवगढ़ थाना इलाके के सीतामगरी बड़ीलांक निवासी मुकेश पुत्र लक्ष्मण मीणा से वनकर्मी ने खुद को मध्यप्रदेश निवासी बताकर सम्पर्क किया। उसे पेंगोलिन के अंगों के साथ गुरुवार शाम मुकेश को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि कमलाकुड़ी निवासी एवं जोलर सरपंच मांगीलाल मीणा भी इस काम में शामिल है।