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Rajasthan: बिजली डील पर 1 पैसे का यू-टर्न! पहले बताई महंगी, अब उसी दर पर 115 मेगावाट खरीद की प्लानिंग

Rajasthan Power Purchase: राजस्थान में बिजली खरीद को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जिस प्रस्ताव को पहले महंगा बताते हुए ऊर्जा विकास निगम के बोर्ड ने खारिज कर दिया था, अब लगभग उसी दर पर दोबारा आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

•

Updated: 10 Apr 2026, 9:58 AM IST

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

Rajasthan Power Purchase: राजस्थान में बिजली खरीद को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जिस प्रस्ताव को पहले महंगा बताते हुए ऊर्जा विकास निगम के बोर्ड ने खारिज कर दिया था, अब लगभग उसी दर पर दोबारा आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। 115 मेगावाट थर्मल पावर आरटीसी (राउंड द क्लॉक) बिजली की खरीद के लिए 5.29 रुपए प्रति यूनिट की दर प्रस्तावित है। इसके लिए 5 वर्ष का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) करने की तैयारी है।

हालांकि, प्रस्ताव अभी कमेटी के पास जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो कुल लागत करीब 1400 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि अन्य राज्यों में भी इसी दर पर बिजली खरीदी जा रही है। खास बात यह है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय भी इसी तरह का प्रस्ताव आया था, लेकिन विरोध के चलते उसे रद्द करना पड़ा था। प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो अतिरिक्त भार सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जाना तय है।

दो बार उठा मामला: एक बार खारिज, दूसरी बार रद्द

  • ऊर्जा विकास निगम ने कुछ वर्ष पहले 500 मेगावाट बिजली खरीद के लिए आयोग में याचिका दायर की थी, लेकिन आयोग ने जरूरत नहीं मानते हुए इसे खारिज कर केवल 165 मेगावाट खरीद की अनुमति दी।
  • इसके बाद वर्ष 2023 में 100 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें 5.30 रुपए प्रति यूनिट की दर सामने आई। विरोध के बाद इसे महंगा बताते हुए रद्द कर दिया गया।

इन सवालों का जवाब जरूरी…

  • पहले 5.30 रुपए प्रति यूनिट महंगा था, तो अब 5.29 रुपए कैसे स्वीकार्य है?
  • लागत आकलन या बाजार परिस्थितियों में ऐसा क्या बदलाव आया कि लगभग समान दर अब उचित मानी जा रही है?
  • क्या सिर्फ अन्य राज्यों में समान दर होने से यहां भी उसी दर पर खरीद जरूरी है?
  • क्या सस्ती शॉर्ट टर्म बिजली के विकल्पों पर विचार किया गया?
  • क्या इस प्रस्ताव से राज्य और निगम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा?
  • क्या बोर्ड के पुराने निर्णय की समीक्षा का आधार सार्वजनिक किया जाएगा?

सचिव का जवाब नहीं

मामले की विस्तृत जानकारी के लिए ऊर्जा विभाग की सचिव आरती डोगरा से संपर्क किया गया, लेकिन उनका जवाब नहीं आया।