राज्य सरकार भले आमजन को नि:शुल्क इलाज की सौगात देकर वाहवाही बटोरी रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन मरीजों का दर्द बढ़ा रहा है। मरीज भटकने को मजबूर है। उन्हें कांवटिया, जेके लोन, जनाना समेत अन्य सरकारी अस्पतालों से जाकर एसएमएस अस्पताल में घंटो कतारों में जूझना पड़ रहा है।
जयपुर. राज्य सरकार भले आमजन को नि:शुल्क इलाज की सौगात देकर वाहवाही बटोरी रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन मरीजों का दर्द बढ़ा रहा है। मरीज भटकने को मजबूर है। उन्हें कांवटिया, जेके लोन, जनाना समेत अन्य सरकारी अस्पतालों से जाकर एसएमएस अस्पताल में घंटो कतारों में जूझना पड़ रहा है। पता चला कि, एसएमएस में रोजाना दो हजार से ज्यादा मरीज व उनके परिजन इस परेशानी से जूझते हैं। आश्चर्य है कि सब कुछ फ्री फिर भी कतारों में लगना पड़ रहा।
मामला ये है कि गणगौरी अस्पताल,जेके लोन अस्पताल, कांवटिया अस्पताल, जयपुरिया अस्पताल, महिला व जनाना अस्पताल के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में ज्यादा सीटी स्कैन, एमआरआई के अलावा बायोस्पी, बायो केमिस्ट्री, पैथोलॉजी की कई जांच नहीं होती है। इसके लिए यहां से सैंपल सवाई मान सिंह अस्पताल में भेजे जाते हैं। क्योंकि इसके लिए उन्हे कई किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है। मरीज को अकेला छोड़कर जाना पड़ता है। उन्हें पहले सैंपल जमा कराने फिर रिपोर्ट लेने भी जाना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज व उनके परिजनों को काफी दिक्कत होती है। सबसे ज्यादा परेशानी महिला व बुजुर्गों को होती है। इस संबंध में मरीजों का कहना है कि जिस अस्पताल में मरीज भर्ती है। वहीं सैंपल एकत्र होने चाहिए। अस्पताल प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वे सीधे सेंट्रल लैब तक सैंपल भिजवा दे तो, मरीजों को भी भटकना नहीं पड़ेगा।
इधर, हस्ताक्षर कराने के लिए भी घूमते रहते इन अस्पतालों से एमआरआई, सीटी स्कैन जांच कराने आने वाले मरीजों को भी परेशानी से जूझना पड़ता है। उन्हें यहां भी दोबारा कतारों में लगकर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। फिर मरीज व उसके परिजनों को पर्ची पर इस अस्पताल के वरिष्ठ आचार्य के हस्ताक्षर करवाने और सील लगवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। ओपीडी समय में इसमें परेशानी कम होती है लेकिन ओपीडी का समय पूरा होने के बाद दिक्कत होती है। वे इमरजेंसी व वार्ड में भटकते रहते हैं।
खत्म हो जाए भीड़ और परेशानी
सबसे ज्यादा परेशानी बायोस्पी जमा कराने में होती है। वे सैम्पल लेकर भटकते नजर आते है। हैरानी की बात है कि गणगौरी अस्पताल या अन्य किसी सरकारी अस्पताल में किसी मरीज का ऑपरेशन हुआ है तो, उसे बायोस्पी की जांच का सैम्पल एसएमएस ही जमा कराना पड़ेगा जबकि एसएमएस से भी सैंपल को एसएमएस मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। ऐसे में अगर कॉलेज में ही इसका इंतजाम हो जाए तो,यहां भीड़ और मरीजों की परेशानी दोनों खत्म हो जाएगी।
यों बयां किया दर्द 30 मिनट से कतार में खड़ा हूं
कांवटिया अस्पताल से सैंपल लेकर आए एक मरीज परिजन ने बताया कि बायोस्पी की जांच के लिए सैंपल लेकर 30 मिनट से कतार में खड़ा हूं। अभी भी 15 मिनट और लगेंगे। मरीज को अकेला छोड़कर आया हूं। पता नहीं यहां के हाल कब सुधरेंगे।
चक्कर लगवा दिए
जेके लोन अस्पताल के एक मरीज का सैंपल लेकर आए परिजन उम्मेद सिंह ने बताया कि सैंपल जमा कराने के लिए सैंपल लेकर एसएमएस आया था। काउंटरों पर तीन चक्कर लगवा दिए। एक घंटा हो गया। दिक्कत हो रही है।