
CM Bhajanlal Sharma
जयपुर: हमारे शास्त्रों में कहा गया कथन "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" भारतीय समाज की वास्तविक संरचना को अभिव्यक्त करता है। नारी को परिवार की धुरी, संस्कारों की वाहक और समाज की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति के रूप में सदैव प्रतिष्ठा मिली है।
यही कारण है कि भारत की विकास यात्रा भी महिलाओं के सशक्तीकरण की गहराई से जुड़ी हुई हैं। इतिहास साक्षी है कि हमारी प्रगति में नारी शक्ति की निर्णायक भूमिका रही है। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, जीजाबाई की दूरदर्शिता, सावित्रीबाई फुले का सामाजिक सुधार और आधुनिक भारत में कल्पना चावला की अंतरिक्ष यात्रा आदि उदाहरण से स्पष्ट होता है कि भारतीय नारी प्रेरणा के साथ परिवर्तन की अग्रदूत रही हैं।
आज भारत 'अमृत काल' में विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है। इस परिप्रेक्ष्य में यह अनिवार्य हो जाता है कि हर स्तर पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी सोच का परिणाम है नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र में ऐतिहासिक मील का पत्थर बनकर उभरा है।
लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14-15 प्रतिशत तक ही सीमित रही है। इस तथ्य को ध्यान यान में रखते हुए इस कानून में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। आरक्षित सीटों में एक-तिहाई हिस्सेदारी अनुसूचित जाति और जनजाति महिलाओं के लिए निर्धारित की गई है।
प्रतिनिधित्व का यह विस्तार नीति-निर्माण में महिलाओं की दृष्टि और संवेदनशीलता को शामिल करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है। अब इस ऐतिहासिक कानून को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए 16-18 अप्रैल तक संसद का एक विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। यह सत्र नारी शक्ति वंदन अधिनियम को वर्ष 2029 के आम चुनावों से लागू करने की ठोस रणनीति का हिस्सा है।
इस विशेष सत्र में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग व्यावहारिक रूप से प्रशस्त किया जाएगा। राजस्थान में भी महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिल रही है। महिलाओं को आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
लाखों महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाना, स्वयं सहायता समूहों को सशक्त करना और जेंडर बजट में उल्लेखनीय वृद्धि करना इस बात का प्रमाण है कि महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ऐसे में यह आवश्यक है कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी समान अवसर मिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी आवश्यकता की पूर्ति करता है। यह कानून महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान के साथ ही लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने का माध्यम है।
प्रस्तावित संसद सत्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहल है। नारी सशक्तीकरण राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त है। जब नारी सशक्त होगी, तभी परिवार सशक्त होगा, समाज सशक्त होगा और राष्ट्र सशक्त होगा। सनातन मूल्यों से प्रेरित यह यात्रा अब आधुनिक लोकतंत्र के साथ मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण कर रही है, जहां नारी नेतृत्वकर्ता के रूप में भी स्थापित होगी।
Updated on:
16 Apr 2026 10:52 am
Published on:
16 Apr 2026 10:30 am
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