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जयपुर। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद संभवतः राजस्थान में भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में महिलाओं का प्रतिशत बढ़ना तय है। माना जा रहा है कि कम से कम 66 महिला विधायकों का विधानसभा में पहुंचना तय है। वहीं, प्रदेश में लोकसभा की आठ सीटें बढ़ सकती है। वर्तमान में लोकसभा की 25 सीटें है। जिनमें कांग्रेस की एक और भाजपा की दो महिला सांसद है।
राजस्थान में वर्तमान में 200 विधानसभा सीटें है। 33% आरक्षण के हिसाब से प्रदेश में 66 सीटें महिलाओं के लिए बढ़ना तय है। कितनी सीटें किस क्षेत्र में बढ़ेगी ये फार्मूला परिसीमन के बाद तय होगा। पहली महिला सीएम राजस्थान विधानसभा के गठन के 51 साल बाद मिली। 2003 में भाजपा की सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे को सीएम बनाया गया। इसी समय पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह भी बनीं।
राज्य विधानसभा के गठन के बाद 1952 में हुए पहले चुनावों में राज्य में 160 सीटों पर चुनाव हुआ था। इस दौरान एक भी विधायक महिला नहीं थी। इसके बाद पहली विधानसभा में हुए उपचुनाव में दो महिला विधायक सदन में पहुंची थी। इसके बाद हर विधानसभा चुनाव में महिलाएं विधायक बनीं, लेकिन उनकी संख्या बहुत अधिक नहीं रही। सबसे ज्यादा महिला विधायक राजस्थान में 2008 के विधानसभा चुनावों में बनी। इस चुनाव में 29 महिला विधायक बन कर सदन में पहुंची थीं। आज तक का यह महिला विधायकों का अधिकतम आंकड़ा बना हुआ है।
राज्य विधानसभा के गठन के बाद पहली बार 160 विधानसभा सीटें बनीं। 1957 में यह सीटें बढ़कर 176 हुई। परिसीमन के बाद 1967 के चुनावों में विधानसभा में सीटों की संख्या 184 हुई। इसके बाद सीटों की संख्या बढ़कर 200 हो गई, जो अभी तक भी नहीं बढ़ी है। महिला आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 266 तक पहुंचने की उम्मीद है।
वर्तमान विधानसभा में 200 विधायकों में से मात्र 21 विधायक ही महिलाएं हैं। इनमें दस भाजपा, 9 कांग्रेस और दो निर्दलीय विधायक हैं।
| विधानसभा | महिला विधायक (संख्या) |
|---|---|
| पहली | 02 |
| दूसरी | 09 |
| तीसरी | 08 |
| चौथी | 06 |
| पांचवी | 13 |
| छठी | 08 |
| सातवीं | 10 |
| आठवीं | 17 |
| नौवीं | 10 |
| दसवीं | 10 |
| ग्यारहवीं | 14 |
| बारहवीं | 12 |
| तेरहवीं | 29 |
| चौदहवीं | 28 |
| पन्द्रहवीं | 24 |
| सोलहवीं | 21 |
(पहली विधानसभा में उपचुनाव में बनीं विधायक)
राज्य में लोकसभा-विधानसभा सीटें बढ़ने से राज्य के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। सांसद और विधायक को हर साल कोष के रूप में 5-5 करोड़ रुपए मिलेंगे। ऐसे में वर्तमान में जहां 200 विधायकों को विकास के लिए साल में एक हजार करोड़ रुपए मिलते हैं, वह बढ़कर 1350 करोड़ (266 सीटें होने पर) रुपए हो जाएगा। वहीं, 66 विधायक बढ़ने पर हर साल वेतन-भत्तों में 12.50 करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा खर्च होगा।
Updated on:
16 Apr 2026 09:01 am
Published on:
16 Apr 2026 08:52 am
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