जयपुर

नौनिहालों को नहीं होगा निमोनिया, प्रदेश में पीसीवी वैक्सीन नियमित टीकाकरण में शामिल

प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में आज से निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन को भी शामिल कर लिया गया है।
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Updated: 7 Apr 2018, 1:37 PM IST
vaccination in rajasthan

आज पहले चरण में नौ जिलों में होगा पीसीवी टीकाकरण

जयपुर
प्रदेश में अब कमजोर तबके के बच्चों को भी निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी से बचाया जा सकेगा। प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में आज से निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन को भी शामिल कर लिया गया है। प्रथम चरण में पीसीवी वैक्सीन प्रदेश के जोधपुर व उदयपुर संभाग के नौ जिलों के बच्चों को लगाया जाएगा, बाद में प्रदेशभर में इसे टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा।

हर साल 12 से 13 हजार बच्चों को फायदा

पीसीवी वैक्सीन से प्रतिरक्षित करके शुरू में प्रतिवर्ष लगभग साढ़े तीन से चार हजार बच्चों को निमोनिया व अन्य बीमारियों से बचाया जाएगा। बाद में इसे 12 से 13 हजार बच्चों तक पहुंचाया जाएगा। सभी के बच्चों को पीसीवी टीका निशुल्क लगाया जाएगा।

दिमागी बुखार व अन्य बीमारियों से भी बचाव

नेशनल हेल्थ मिशन से मिली जानकारी के अनुसार बच्चों को पीसीवी की दो प्राइमरी डोज और एक बूस्टर डोज छह सप्ताह, 14 सप्ताह और नौंवे माह में लगाई जाएंगी। केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए यह वैक्सीन महंगे हैं, इनकी प्रत्येक डोज ढाई सौ से तीन सौ रुपए की होती है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर सरकारी टीकाकरण केंद्र पर प्रत्येक बच्चे को यह वैक्सीन अन्य टीकों की तरह नि:शुल्क लगाई जाएगी। न्यूमोकोकल बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया, दिमागी बुखार व अन्य बीमारियों से बचाव के लिए यह टीका पूरी तरह सुरक्षित व असरदार है।

जल्द ही पूरे प्रदेश के बच्चों को मिलेगा लाभ
प्रथम चरण में निमोनिया प्रतिरक्षण की यह वैक्सीन बांसवाड़ा, बाड़मेर, डूंगरपुर, जालौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमन्द, सिरोही व उदयपुर जिलों में प्रारंभ की जा रही है। जल्दी ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी पीसीवी वैक्सीन नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल की जाएगी।

फिलहाल निजी अस्पतालों व चिकित्सकों के पास ही उपलब्धता

फिलहाल निजी अस्पतालों व चिकित्सकों के पास यह टीका उपलब्ध है, जो कि लगभग पंद्रह सौ रुपए में बच्चों को लगाया जा रहा है। कीमत ज्यादा होने के कारण यह वैक्सीन अभी कमजोर और गरीब तबके के लोगों की पहुंच से दूर है। इससे उनके बच्चों का इन बीमारियों से बचाव नहीं हो पाता है, लेकिन अब एेसा नहीं होगा।

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