गर्मी से निजात पाने के लिए लोग एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं। एसी के इस्तेमाल में तापमान का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। दरअसल, आमतौर पर लोग एसी को 18-20 डिग्री तामपान चलाते हैं।
जयपुर। गर्मी से निजात पाने के लिए लोग एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं। एसी के इस्तेमाल में तापमान का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। दरअसल, आमतौर पर लोग एसी को 18-20 डिग्री तामपान चलाते हैं। जबकि ऊर्जा मंत्रालय एवं डॉक्टर्स के अनुसार एसी को 24-25 डिग्री तापमान पर ही चलाना चाहिए। यह घर के बजट और घर के सदस्यों के स्वस्थ्य दोनों के लिए अच्छा है।
एनर्जी ऑफ ब्यूरो एफिशियंसी के अनुसार सामान्यत: लोग एसी को 20-21 डिग्री पर चलाते हैं। यदि एसी को 24-25 डिग्री पर चलाया जाए तो 24 प्रतिशत तक बिजली बचाई जा सकती है। यदि एसी को 23 डिग्री से 24 डिग्री पर कर दिया जाए तो इससे बिजली की खपत 6 फीसदी तक कम होगी। दरअसल, जब आप एसी का तापमान 18-20 डिग्री पर सेट कर देते हैं तो कमरे के तापमान को कम रखने के लिए कम्प्रेसर को ज्यादा समय तक मेहनत करनी पड़ती है और वह ऑटोकट न के बराबर होता है। ऐसे में बिजली की खपत अपेक्षाकृत अधिक होती है।
“सिक बिल्डिंग सिंड्रोम” का खतरा...नर्व सिस्टम पर भी असर
वहीं एसी के लगातार इस्तेमाल से “सिक बिल्डिंग सिंड्रोम” का खतरा बढ़ सकता है। इसमें सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, सूखी खांसी, थकान, सुगंध के प्रति संवेदनशीलता, चक्कर आने या जी मिचलाने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। राजधानी के विभिन्न न्यूरोफिजिशियन और गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट के पास इस तरह के मामले आने लगे हैं। ऐसे करीब 50 प्रतिशत मामलों में एसी को इन लक्षणों का जिम्मेदार माना जा रहा है।
नर्व सिस्टम को कर रहा प्रभावित
एसी का तापमान बेहद कम होने से दिमाग पर बुरा असर भी पड़ सकता है। इससे दिमाग की कोशिकाएं सिकुड़कर दिमाग की क्षमता और कार्यशीलता को प्रभावित करती है। न्यूरोफिजिशियन डॉ.भावना शर्मा के अनुसार अति गर्म और अति ठंडे माहौल में लगातार रहने से शरीर का आंतरिक तंत्र प्रभावित होता है। एसी कमरे से आद्रता लेकर कमरे को डिहाइड्रेट कर देता है। इससे माइग्रेन होने का खतरा हो सकता है। अति ठंडे माहौल में रहने से नर्व सिस्टम भी प्रभावित होता है। इनमें झनझनाहट की समस्या होती है। इस तरह के मामले गर्मी के साथ ही रोजाना 4-5 मरीज मरीज इस तरह के आना शुरू हो गए हैं।
समझ ही नहीं पाते, एसी के कारण भी डिहाइड्रेशन हो रहा
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ.रमेश रूपरॉय ने बताया कि उनके पास गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या लेकर कई मरीज आते हैं। वे गर्मी को ही इसका बड़ा कारण मानते हैं, लेकिन करीब 30 से 40 प्रतिशत ऐसे मरीज भी होते हैं..जो रोजाना 10 घंटे तक एसी की हवा में रहते हैं। उनमें डिहाइड्रेशन की समस्या बार-बार होने का यह भी एक बड़ा कारण रहा। उनकी काउंसलिंग करने पर एसी का उपयोग कम किया तो समस्या स्वत: दूर होती गई।
यह लक्षण नजर आएं तो एसी हो सकता है कारण
- शरीर की सारी नमी सोख लेता है, जिससे त्वचा की बाहरी परत में पानी का नुकसान होता है, और वह रूखी होने लगती है
- पानी की कमी के कारण शरीर में रक्त प्रवाह सुचारू नहीं रह पाता
- त्वचा सिकुड़ी हुई महसूस होती है जिससे झुर्रियां नजर आने लगती है
- डिहाइड्रेशन, एलर्जी और अस्थमा की जोखिम बढ़ जाती है
- ज्यादा ठंडी हवाके कारण खांस, जुखाम और श्वांस की समस्या
- आंखों और त्वचा पर खुजली
- शरीर में सुस्ती और आलस
- वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण
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यह करें
- जब ज्यादा गर्मी लगे या फिर दोपहर के कुछ ही घंटे दिन में एसी चलाना चाहिए
- रात को सोते समय कुछ देर के लिए ही एसी चलाएं
- एसी की हवा से तुरंत खुली धूप में नहीं जाएं
- धूप से सीधे एसी की हवा में नहीं जाएं
- ज्यादा एसी का उपयोग कर रहे हैं तो थोडी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें