
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान दौरे और बालोतरा के पचपदरा में राज्य की पहली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी के लोकार्पण कार्यक्रम के बीच प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ा रहा। इस ऐतिहासिक परियोजना के उद्घाटन से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार दो पोस्ट साझा करके राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने राजस्थान के स्थानीय लोगों के रोजगार, पेट्रोकेमिकल जोन के भविष्य और इस पूरी परियोजना के वास्तविक इतिहास को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं, जिससे इस मेगा प्रोजेक्ट के क्रेडिट को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सोशल मीडिया प्रतिक्रिया में कहा कि आज का दिन राजस्थान के लिए बेहद ऐतिहासिक है क्योंकि राज्य की पहली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी का उद्घाटन होने जा रहा है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई यह बड़ी योजना आज पूरी तरह क्रियाशील हो रही है। गहलोत ने इतिहास साझा करते हुए बताया कि 2008 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही राजस्थान में रिफाइनरी लगाने के गंभीर प्रयास शुरू किए गए थे।
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में स्पष्ट लिखा कि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के विशेष सहयोग के कारण ही राजस्थान को यह रिफाइनरी मिल सकी थी। इस प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा और वीरप्पा मोइली के साथ लगातार बैठकें और संपर्क किया गया, जिसके बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को इस प्रोजेक्ट के लिए सहमत किया जा सका। वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के दौरान ही सोनिया गांधी और वीरप्पा मोइली ने पचपदरा में इस रिफाइनरी का आधिकारिक शिलान्यास किया था।
गहलोत ने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि 2013 में शिलान्यास के बाद राज्य में सत्ता बदलने पर राजनीतिक कारणों से 5 साल तक रिफाइनरी का काम पूरी तरह बंद रखा गया। इस देरी के कारण प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत जो केवल 37,000 करोड़ रुपये थी, वह समय के साथ दोगुनी से भी अधिक बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद 2018 में जब दोबारा कांग्रेस सरकार बनी, तो इस काम को प्राथमिकता पर लिया गया और कोविड-19 जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा करवा दिया गया था।
राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना को एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बताते हुए गहलोत ने कहा कि सामान्यतः रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकारों की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है। परंतु एचपीसीएल को राजस्थान में प्लांट लगाने के लिए राजी करने के उद्देश्य से तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% की हिस्सेदारी ली थी।
इसी के परिणामस्वरूप 'एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड' (HRRL) नामक संयुक्त उद्यम का गठन हुआ, जिसने इस पूरी रिफाइनरी का निर्माण पूरा किया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, गहलोत ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने इसे पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और कहा कि मुख्यमंत्री को अपने ही राज्य की इतनी बड़ी परियोजना के इतिहास और शिलान्यास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। उन्होंने नसीहत दी कि मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने प्रशासनिक अधिकारियों से सही आंकड़े और मूल दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लेने चाहिए।
परियोजना के मानवीय और स्थानीय विकास के पहलू पर जोर देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार का मूल विजन रिफाइनरी के साथ एक बड़ा पेट्रोकेमिकल जोन बनाने का था। इस जोन में रिफाइनरी से निकलने वाले बाई-प्रॉडक्ट्स (By-products) के आधार पर प्लास्टिक और अन्य सहायक उद्योग लगाए जाने थे, जिससे लाखों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता। कांग्रेस सरकार ने इसके लिए जमीन भी आवंटित की थी, लेकिन वर्तमान में यह योजना ठंडे बस्ते में है। गहलोत ने मांग की है कि इस पेट्रोकेमिकल जोन का काम तेजी से शुरू किया जाए और इसे पूरी तरह से राजस्थानी लोगों के लिए आरक्षित किया जाए ताकि बाहर के व्यवसायियों के बजाय स्थानीय लोगों को उद्योग लगाने और रोजगार में प्राथमिकता मिल सके।