
PM Modi and Ex CM Ashok Gehlot File PIC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान दौरे को लेकर जहां एक तरफ प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर भव्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मेगा विजिट से ठीक पहले राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है। पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण कार्यक्रम से पहले इसके वास्तविक इतिहास और क्रेडिट लेने की राजनीति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच सीधा जुबानी जंग शुरू हो गई है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज कर दी है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने मीडिया के सामने दावा किया था कि पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। गहलोत ने स्पष्ट कहा कि एक सूबे के मुखिया को अपने ही राज्य की इतनी बड़ी और महत्वाकांक्षी विकास परियोजना के बुनियादी इतिहास की जानकारी न होना बेहद चिंताजनक है।
अपने दावों को मजबूती से पेश करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वर्ष 2013 में आयोजित हुए पचपदरा रिफाइनरी के वास्तविक शिलान्यास समारोह की ऐतिहासिक तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इस रिफाइनरी की नींव तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली की मौजूदगी में रखी गई थी।
उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज और तस्वीरें गवाह हैं कि इस ड्रीम प्रोजेक्ट की शुरुआत कांग्रेस शासन के दौरान ही आधिकारिक रूप से हो चुकी थी।
अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2013 में काम शुरू होने के बाद जैसे ही राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ, इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पांच वर्षों के लिए पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
गहलोत के अनुसार, इस राजनीतिक गतिरोध और देरी के कारण रिफाइनरी की शुरुआती अनुमानित लागत जो लगभग 37,000 करोड़ रुपये थी, वह समय पर काम न होने के कारण दोगुनी से भी अधिक बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिससे सीधे तौर पर राज्य के राजस्व को नुकसान हुआ।
राजस्थान जैसे मरुस्थलीय राज्य में देश के पहले एकीकृत ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को स्थापित करना कितना चुनौतीपूर्ण था, इस पर पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने बताया कि सामान्य तौर पर रिफाइनरी के बड़े प्रोजेक्ट्स में किसी भी राज्य सरकार की कोई सीधी वित्तीय हिस्सेदारी नहीं होती है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को इस प्रोजेक्ट के लिए राजस्थान में निवेश करने के लिए सहमत करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए रिफाइनरी में राज्य के लिए 26% की हिस्सेदारी सुनिश्चित की, जिसके बाद ही 'एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड' (HRRL) नाम से एक संयुक्त उद्यम का गठन संभव हो सका।
अपने बयान के आखिरी हिस्से में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों और मीडिया के समक्ष ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने या गलत बयानबाजी करने के बजाय मुख्यमंत्री जी को अपने प्रशासनिक अधिकारियों और सचिवालय से इस प्रोजेक्ट से जुड़े सही आंकड़े, फाइलें और मूल दस्तावेज मंगवाकर अच्छी तरह से पढ़ लेने चाहिए ताकि जनता के बीच कोई भ्रामक जानकारी न जाए।
Updated on:
04 Jul 2026 09:13 am
Published on:
04 Jul 2026 09:08 am
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