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Rajasthan Monsoon: राजस्थान में क्या इस बार मानसून में कम बारिश होगी? शुरुआती बारिश के आंकड़े क्या कहते हैं

दक्षिण पूर्वी राजस्थान के ज्यादातर इलाकों में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान कहीं-कहीं पर भारी और कहीं पर अति भारी बारिश होने की संभावना है।
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दो दिन से मानसून की बारिश से बीसलपुर बांध की जीवनदायी त्रिवेणी नदी में पानी की आवक शुरू हो गई। Photo- Patrika

जयपुर। राजस्थान में 2 जुलाई को मानसून का आगमन हो गया। मानसून आने के साथ ही प्रदेश में लोगों को गर्मी से राहत मिली है। 2025 में मानसून की एंट्री राज्य में 18 जून को हुई थी। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि 3 जुलाई को उदयपुर, अजमेर व जयपुर संभाग के कुछ और भागों में मानसून आगे बढ़ा है। वर्तमान में मानसून की उत्तरी रेखा उदयपुर, अजमेर व झुंझुनूं जिले से होकर गुजर रही है। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार आगामी 3 से 4 दिन राज्य के शेष अधिकांश भागों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल है।

राजस्थान में कहां-कहां पहुंच गया मानसून

मौसम विभाग के अनुसार दो दिन में मानसून ने झालावाड़, कोटा, बारां, बूंदी, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, जयपुर, दौसा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, अलवर, उदयपुर, अजमेर, सीकर, नागौर, झुंझुनूं और टोंक समेत प्रदेश के करीब 25 जिलों को कवर कर लिया है। जल्द ही मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। पिछले 24 घंटों में मानूसन पूर्वी राजस्थान के ज्यादातर इलाकों में सक्रिय रहा। इस दौरान कुछ जगह अच्छी बारिश भी दर्ज हुई। सबसे ज्यादा बारिश जयपुर में 84 एमएम रिकॉर्ड की गई।

एक सप्ताह सक्रिय रहेगा मानसून

दक्षिण पूर्वी राजस्थान के ज्यादातर इलाकों में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान कहीं-कहीं पर भारी और कहीं पर अति भारी बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से कोटा और उदयपुर संभाग और आसपास के लगने वाले जिलों में अगले कुछ दिन के लिए भारी और कहीं पर अति भारी बारिश के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।

सीमावर्ती क्षेत्रों को अभी करना होगा बारिश के लिए इं​तजार

जयपुर संभाग के भरतपुर, अजमेर और जोधपुर संभाग के इलाकों के लिए भी अगले पांच-सात दिन के दौरान ज्यादातर इलाकों में मानसून सक्रिय रहने और शेष इलाकों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से कंडीशन अनुकूल बनी हुई है। इस दौरान कहीं-कहीं पर तेज हवा, आकाशीय बिजली के साथ कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। बीकानेर संभाग के भी कुछ भागों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों को अभी बारिश के लिए इं​तजार करना होगा।

जानिए शुरुआती मानसून राज्य के लिए कैसा है

आईएमडी ने इस मौसम में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया है, जो दीर्घकालिक औसत से 10 प्रतिशत तक कम हो सकती है। राजस्थान में मानसून की औसत वर्षा (1 जून से 30 सितंबर) 435.6 मिमी है। भले ही प्रदेश में इस बार मानसून निर्धारित तिथि से करीब एक सप्ताह की देरी से प्रवेश हुआ हो, लेकिन अब तक पूरे राजस्थान में सामान्य के करीब 66 एमएम बरसात दर्ज हुई है।

अभी भी अगले एक सप्ताह के दौरान राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। ऐसे में कुल मिलाकर फिलहाल मानसून का शुरुआती दौर प्रदेश के लिए अच्छा है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में कई बार मानसून के आगमन में देरी हुई है। वर्ष 2010 और 2019 के बीच जब 15 जून को मानसून के आगमन की सामान्य तिथि माना जाता था। इस दौरान मानसून केवल एक बार 2013 में समय पर आया था।

राजस्थान में कब मेहरबान रहेगा मानसून

राजस्थान में इस वर्ष जुलाई और अगस्त माह में अच्छे मानसून सीजन की उम्मीद बेहद कमजोर रहने के संकेत हैं। सितंबर माह में विदाई से पहले प्रदेश में मेहरबान होने की संभावना है। पिछले 27 वर्षों में जुलाई माह में मानसून का यह 8वीं बार प्रवेश है। इससे पहले वर्ष 2019 में मानसून ने 2 जुलाई को प्रवेश किया था।

राजस्थान के 693 बांधों में से 319 सूखे

मानसून के देरी से आने के बावजूद 2025 में राजस्थान में 715.9 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 64 प्रतिशत अधिक है और 1917 में दर्ज 844.2 मिमी के बाद राज्य के दर्ज इतिहास में दूसरी सबसे अधिक मौसमी बारिश है। पिछले साल अच्छी बारिश के बावजूद, इस साल राजस्थान के 693 बांधों में से 319 वर्तमान में सूखे हैं, 369 में आंशिक जल भंडारण (10-90% क्षमता) है। केवल पांच ही पूरी तरह भरे हुए हैं। 90 प्रतिशत से अधिक जल भंडार वाले प्रमुख जलाशयों में जयपुर का कानोता बांध, कोटा का कोटा बैराज और दौसा का मोरेल बांध शामिल है।