मां का शरीर नानी के शरीर और अन्न से एवं नानी का शरीर उसकी मां (पडऩानी) के अन्न से बना।
Gulab Kothari Article : हमारी दादी-नानी की रसोई : शरीर ही मां है, ननिहाल है। मां का ननिहाल भी है। शरीर अन्नमय कोश है। अन्न ब्रह्म है। अन्न से ही शरीर के सप्त धातुओं का निर्माण होता है। मेरा शरीर भी मां के अन्न से बना है। पिता का शरीर भिन्न होता है। अन्न का एक स्वरूप, स्वाभाविक प्रकृति होती है जो उस परिवार में पीढिय़ों से चल रहा है। पिता का शरीर भी यूं तो दादी के शरीर से ही बनता है, जो किसी अन्य परिवार से आई है, किन्तु पिता के पास खानदान के वृक्ष का बीज होता है, जिसमें सात-पीढिय़ों के अंश रहते हैं। पिता के शरीर की अन्तिम धातु-शुक्र में ये अंश रहते हैं। अन्न ब्रह्म है तो ब्रह्म का बीज भी अन्न के माध्यम से शरीर में आता है।