
कोयंबत्तूर. राज्य सरकार द्वारा नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने के चलते पुलिस अधिकारियों ने कुछ दवाओं के दुरुपयोग पर कानूनी खामियों की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि कानूनी ढांचा मजबूत किया जाए ताकि सख्त सज़ा सुनिश्चित हो सके। पुलिस ने विशेष रूप से दो दर्दनिवारक दवाओं टाइडोल और टैपेंटाडोल का उल्लेख किया, जो अक्सर छापों में जब्त की जाती है। लेकिन एनडीपीएस अधिनियम में शामिल न होने के कारण इन पर सख्त कार्रवाई संभव नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टैपेंटाडोल, टाइडोल, नाइट्राज़ेपाम जैसी दवाओं का दुरुपयोग युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। नाइट्राज़ेपाम पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है, लेकिन टाइडोल और टैपेंटाडोल केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (शेड्यूल एच) के तहत आती हैं, जिनको पुलिस प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सकती।
सामान्य अदालतों में मामले चलने से आरोपी आसानी से जमानत ले लेते हैं
उन्होंने कहा एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामले विशेष अदालतों में चलते हैं, जहां त्वरित सुनवाई और अधिकतम सज़ा संभव होती है, लेकिन टाइडोल और टैपेंटाडोल के मामले सामान्य अदालतों में चलते हैं, जहां आरोपी आसानी से जमानत पा लेते हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि कई बार आरोपी इन गोलियों को नसों में इंजेक्शन द्वारा लेते हैं, जिससे नशे का असर तुरंत होता है। इस तरह की दवा प्रशासन की गलत विधि पर भी सख्त कानूनी प्रावधान की मांग की गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि या तो राज्य सरकार केंद्र को एनडीपीएस अधिनियम में संशोधन की सिफारिश करे या फिर राज्य स्तर पर अलग कानून बनाए। हाल ही कोयंबतूर पुलिस ने कर्नाटक, केरल, मुंबई और हिमाचल प्रदेश से आ रही आपूर्ति को रोकने में सफलता पाई है। गौरतलब है राज्य सरकार ने हाल ही 7-बिंदु एंटी-ड्रग फ्रेमवर्क लागू किया है और 65 विशेष एंटी-नार्कोटिक टास्क फोर्स स्टेशन स्थापित किए हैं।