जयपुर

प्रदूषण: 51 करोड़ लोगों की जिंदगी में घट सकते हैं 7.6 साल

उत्तर भारत में रहने वाले लगभग 51 करोड़ लोग वायु प्रदूषण के कारण अपने जीवन के 7.6 साल खोने की राह पर हैं। एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर वायु प्रदूषण का मौजूदा स्तर यही रहता है तो देश में स्वास्थ्य के लिए यह सबसे बड़ा खतरा होगा। शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआइसी) के शोधकर्ताओं ने कहा है कि 2013 से दुनियाभर में प्रदूषण के आंकड़ों में 44 प्रतिशत वृद्धि अकेले भारत से हुई है।
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Jun 15, 2022
World Earth Day: The burden of pollution on the earth
हम विश्व पृथ्वी दिवस को मनाने जा रहे हैं। इस वर्ष के आयोजन की थीम इन्वेस्ट इन अवर प्लेनेट है।

63% भारतीय प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में करते हैं निवास

1.8 वर्ष जीवन प्रत्याशा कम हो रही वायु प्रदूषण की वजह से

उत्तर भारत में रहने वाले लगभग 51 करोड़ लोग वायु प्रदूषण के कारण अपने जीवन के 7.6 साल खोने की राह पर हैं। एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर वायु प्रदूषण का मौजूदा स्तर यही रहता है तो देश में स्वास्थ्य के लिए यह सबसे बड़ा खतरा होगा। शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआइसी) के शोधकर्ताओं ने कहा है कि 2013 से दुनियाभर में प्रदूषण के आंकड़ों में 44 प्रतिशत वृद्धि अकेले भारत से हुई है।

वर्ष 1998 के बाद से भारत के प्रदूषण सूचकांक में 61.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बड़े खतरे का संकेत दर्शाती है। वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआइ) के नए विश्लेषण के अनुसार वायु प्रदूषण औसत भारतीय जीवन प्रत्याशा को पांच साल तक कम कर देता है। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल दिल्ली में प्रदूषण जीवन के लगभग 10 साल कम करता दिख रहा है।

दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा खतरा

अध्ययन में बताया है कि वायु प्रदूषण के कारण जितना बड़ा संकट दक्षिण एशिया में देखा जा रहा है, ऐसा और कहीं नहीं है। यदि प्रदूषण का मौजूदा उच्च स्तर कुछ साल तक ऐसे ही बना रहता है तो आने वाले वर्षों में इसके और भी घातक परिणाम देखे जा सकते हैं।

धूम्रपान से कहीं अधिक हानिकारक है प्रदूषण

अध्ययन में दावा किया है कि भारत में वायु प्रदूषण धूम्रपान से कहीं अधिक हानिकारक बन रहा है। धूम्रपान के कारण विशेषज्ञ जहां जीवन प्रत्याशा को 1.5 वर्ष कम होता मानते हैं, वहीं वायु प्रदूषण के चलते यह 1.8 वर्ष के करीब देखी जा रही है। देश की 63 प्रतिशत से अधिक आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जहां की वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है। जीवन प्रत्याशा के हिसाब में इसका बढ़ना मानव सेहत के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे इलाकों में लंबे समय तक रहने वाले लोगों की औसत आयु पांच साल तक कम होती दिख रही है।

भारत विश्व का दूसरा सबसे प्रदूषित देश

वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण को लेकर किए गए विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने खुलासा किया कि बांग्लादेश के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषित देश है। देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बहुत ही गंभीर स्थिति में है। शोधकर्ताओं का दावा है कि भारत की बड़ी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जहां का एनुअल एवरेज पार्टिकल पॉल्यूशन डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों से कहीं अधिक है।

Published on:
15 Jun 2022 11:48 pm