कोरोना संक्रमण: सात दिन में 572 कोरोना मरीज आ गए अब हर दिन 1 हजार से अधिक सैंपल अलवर. जिले में अब हर दिन कोरोना के एक हजार से अधिक सैंपल लिए जाने लगे तो अलवर में संक्रमण ने प्रदेश के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। एक तरह से सैंपल बढ़ाते ही जिले में कोरोना वायरस को लेकर सच्चाई सामने आने लगी है। इससे पहले सैंपल की संख्या कम होने से पॉजिटिव का आंकड़ा बहुत अधिक नहीं था लेकिन, सात दिनों के आंकड़ों ने तो प्रदेश के सभी जिलों को पीछे छोड़ दिया है। बुधवार को जिले में 11 सौ से अधिक सैंपल जांच के लिए भेजे गए तो र
आगामी सात दिन में बढ़ सकता है आंकड़ा
चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आगामी सात दिनों में कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। असल में प्रति दिन करीब एक हजार से अधिक सैंपल लिए जाएंगे तो पहले से करीब दो गुना से अधिक मरीज सामने आ सकते हैं। पूर्व जिला कलक्टर के समय एक दिन में करीब 350 से 500 तक सैंपल लिए जाते थे। लेकिन, मौजूदा कलक्टर ने आते ही चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया कि अधिक से अधिक सैंपल लेकर जांच कराएं जिससे जिले में कोरोना के संक्रमण की असलियत का पता चल सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि भिवाड़ी में सैंपल संख्या के अनुपात में सबसे अधिक पॉजिटिव आए हैं। भिवाड़ी में अलवर शहर की तुलना में एक तिहाई सैंपल कम लिए हैं लेकिन, पॉजिटिव शहर से काफी अधिक आए हैं।े
दवा ले तो कोरोना का खतरा,
नहीं ले तो एचआईवी का भय
सीकर. पिछले तीन माह से जिला लैब में कोरोना की मशीन लगाए जाने के बाद एचआईवी संक्रमित मरीजों की मुसीबत बढ गई है। एआरटी सेंटर के पास ही कोविड लैब चलने से एआरटी सेंटर के बाहर कोविड के पीपीई किट को ऑटो क्लेव करने की मशीन और परिसर में कोविड जांच के दौरान प्रयुक्त होने वाले बायोवेस्ट के बैग पडे दिखते हैं। कई एचआइवी मरीज तो एआरटी सेंटर तक पहुंच जाते हैंं, लेकिन न तो उन मरीजों की काउंसलिंग हो रही है और न ही इन मरीजों को अलग से काउंटर पर दवा मिल रही है। आश्चर्य की बात है कि पिछले तीन माह से एचआईवी के अधिकांश मरीज दवा लेने तो आते हैं लेकिन कोविड संक्रमण के भय से बिना दवा लिए ही वापस लौट जाते हैं। सीकर में 3 हजार से ज्यादा एचआईवी मरीज पंजीकृत है।
&कोविड लैब शुरू होने के बाद से एआरटी सेंटर में आने वाले एचआईवी मरीजों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है। कई मरीज को दवा लेने तक नहीं आ रहे हैं और न ही मरीजों की काउंसलिंग हो रही है।
विक्रम शर्मा,
प्रोजेक्ट डायरेक्टर, विहान