27 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Jaipur: ‘शहंशाह’ बताकर दी थी डिप्टी सीएम की बेटी के अपहरण की धमकी, कोर्ट ने याचिका की खारिज

राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी की पुत्री गौरवी कुमारी के अपहरण और जान से मारने की धमकी देकर फिरौती मांगने वाले की जमानत याचिका अपर सेशन न्यायाधीश ने भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के संबंध में गोपनीय तथ्यों की जानकारी रखना सामान्य बात नहीं है।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Kamal Mishra

Jun 11, 2026

Manak Chowk Police

Jaipur: माणक चौक पुलिस थाना (फाइल फोटो)

जयपुर। राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी की पुत्री गौरवी कुमारी के अपहरण और जान से मारने की धमकी देकर फिरौती मांगने के मामले में गिरफ्तार आरोपी को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर सेशन न्यायाधीश ने आरोपी सिमान्ता दास की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़े इतने गोपनीय तथ्यों की जानकारी किसी सामान्य व्यक्ति के पास होना असामान्य है। ऐसे गंभीर मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा।

मामले के अनुसार, 29 मई 2026 को सिटी पैलेस, जयपुर के ओएसडी ने माणक चौक थाने में एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उप-मुख्यमंत्री के मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए, जिनमें भेजने वाले ने खुद को ‘शहंशाह’ बताया था। संदेशों में उप-मुख्यमंत्री की बेटी गौरवी कुमारी का जिक्र करते हुए धमकी दी गई थी। इसके बाद संबंधित नंबर पर सामान्य कॉल की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। हालांकि व्हाट्सएप कॉल करने पर आरोपी ने फोन उठाया और अपना नाम सिमान्ता दास उर्फ सुमंता बताया।

आरोपी के पास थी गोपनीय जानकारी

आरोपी ने बातचीत के दौरान उप-मुख्यमंत्री की आसाम की गोपनीय यात्रा का हवाला देते हुए गौरवी कुमारी के अपहरण और हत्या की धमकी दी तथा फिरौती की मांग की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट में बताया मानसिक रोगी

जमानत सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि सिमान्ता दास मानसिक रोग से पीड़ित है और वर्ष 2020 से उसका इलाज चल रहा है। वकील ने दावा किया कि आरोपी सामान्य रूप से सोचने-समझने में पूरी तरह सक्षम नहीं है, इसलिए उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

यह वीडियो भी देखें :

अभियोजन का कड़ा विरोध

वहीं, अपर लोक अभियोजक सुरेश कुमावत ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा।

कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

अदालत ने केस डायरी, दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की पुत्री के गोपनीय दौरों की जानकारी किसी आम व्यक्ति के पास होना संभव नहीं है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

पहले भी याचिका हो चुकी है खारिज

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान समय में प्रतिष्ठित व्यक्तियों को व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजकर फिरौती मांगने के अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में आरोपी को राहत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले आरोपी की जमानत याचिका मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत से भी खारिज हो चुकी है।

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग