
किसान पाठशाला का आयोजन
रोगों और कीटों की पहचान बताकर उपाय बताए
निवाई. फसल में रोग और कीट का प्रकोप बढ़ने के बाद उपचार करने से बेहतर है कि समय रहते उसकी पहचान कर रोकथाम की जाए। इसी संदेश के साथ भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के टिड्डी सह एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र जयपुर की ओर से मंगलवार को मोतीपुरा गांव में किसान खेत पाठशाला आयोजित की गई। कृषि अधिकारियों ने किसानों को मूंगफली की फसल में लगने वाले रोगों और कीटों की पहचान से लेकर उनके जैविक एवं वैज्ञानिक नियंत्रण तक की जानकारी दी। शुरुआत में केंद्र के सहायक पौध संरक्षण अधिकारी श्योराम ने किसान खेत पाठशाला के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला।
निगरानी करने की सलाह
उन्होंने मूंगफली की फसल में आने वाले प्रमुख रोगों एवं कीटों के लक्षणों की जानकारी देते हुए किसानों को समय पर फसल की निगरानी करने की सलाह दी। केंद्र के सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ.अभिषेक ने सफेद लट कीट के जीवन चक्र और फसल पर इसके प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने इसके प्रबंधन में उपयोगी ब्यूवेरिया बेसियाना जैविक फफूंद के प्रयोग की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया।
एग्री क्लीनिक एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी तथा कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने मूंगफली में होने वाले कॉलर रॉट रोग की पहचान और नियंत्रण के उपाय बताए। उन्होंने जैविक खेती में उपयोगी ट्राइकोडर्मा के साथ फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप तथा नीले एवं पीले चिपचिपे पाश के उपयोग की जानकारी दी। इन उपायों से फसल में कीटों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिलने की बात कही। पाठशाला के बाद अधिकारियों ने किसानों के साथ मूंगफली और तिल के खेतों का अवलोकन किया। फसलों की स्थिति देखने के बाद अधिकारियों ने कीट एवं रोगों की स्थिति के अनुसार किसानों को मौके पर ही विभागीय सिफारिशों के अनुरूप नियंत्रण के उपाय बताए।इस दौरान क्षेत्र की कृषि पर्यवेक्षक मनिता यादव एवं जीतराम चौधरी ने किसान खेत पाठशाला के माध्यम से किसानों को फसल की नियमित निगरानी, समय पर रोग एवं कीट की पहचान तथा समेकित नाशीजीव प्रबंधन अपनाने का संदेश दिया गया।
फोटोकेप्शन
एनई2508सीसी-निवाई. गांव मोतीपुरा में किसानों के साथ टिड्डी सह एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र जयपुर की टीम।