जयपुर

जैसलमेर के संरक्षण केंद्र में दो नए गोडावण चूजे निकले, प्राकृतिक और कृत्रिम तरीके से सफल हॉचिंग

ProjectGIB: चूजों की सॉफ्ट रिलीज से जंगल में वापसी शुरू, विलुप्ति के कगार से उड़ान की नई उम्मीद बंधी।
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Updated: 15 Mar 2026, 3:48 PM IST
photo source: X Handel
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GreatIndianBustard:जैसलमेर. भारत की सबसे दुर्लभ पक्षी प्रजाति ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को बचाने के प्रयासों में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Project GIB) के चौथे साल में राजस्थान के जैसलमेर जिले के कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में इस सप्ताह दो नए चूजे सफलतापूर्वक निकले। इनमें से एक चूजा प्राकृतिक संभोग से और दूसरा आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन (कृत्रिम गर्भाधान) से पैदा हुआ।

मंत्री भूपेंद्र यादव ने X पर दी जानकारी

इस उपलब्धि के साथ कैद में कुल GIB की संख्या अब 70 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने X पर इस सफलता की जानकारी साझा करते हुए लिखा, “प्रोजेक्टGIB कैद प्रजनन के चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। राजस्थान के कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में दो नए चूजे निकले – एक प्राकृतिक और दूसरा कृत्रिम तरीके से। कैद में अब 70 पक्षी हैं।” उन्होंने राजस्थान वन विभाग के अधिकारियों को बधाई दी और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण-संवेदनशील नेतृत्व में यह प्रोजेक्ट सफलता की राह पर है।

दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक

ये चूजे मुख्य रूप से जैसलमेर के सम (Sam) गांव में स्थित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में पैदा हुए हैं। यह केंद्र 2018 में शुरू हुआ था, जबकि दूसरा बड़ा केंद्र 2022 में रामदेवरा (पोखरण) में खोला गया। दोनों केंद्र वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और राजस्थान वन विभाग के संयुक्त प्रयास से चल रहे हैं। GIB को स्थानीय भाषा में 'गोडावन' भी कहते हैं, जो दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है।

प्रोजेक्ट का उम्मीद भरा चरण

यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि GIB अब विलुप्ति के कगार पर हैं। जंगलों में सिर्फ 130-150 पक्षी बचे हैं, ज्यादातर राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र में। कैद प्रजनन कार्यक्रम 2019-2022 से पूरी तरह सक्रिय है। अब सबसे बड़ा कदम – इस साल के कुछ कैद-पालित चूजों को 'सॉफ्टरिलीज' किया जाएगा। सॉफ्ट रिलीज में पक्षियों को पहले नियंत्रित तरीके से जंगल में छोड़ा जाता है, ताकि वे धीरे-धीरे स्वतंत्र जीवन जीना सीखें। यह प्रोजेक्ट के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन उम्मीद भरा चरण है।

जीन पूल बढ़ाने में मदद

पर्यावरणविदों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन की सफलता जीन पूल बढ़ाने में मदद करेगी। प्रोजेक्ट GIB 2013 में राजस्थान सरकार द्वारा शुरू हुआ था, लेकिन अब केंद्र सरकार के समर्थन से यह राष्ट्रीय स्तर का प्रयास बन गया है। अगर यह सफल रहा, तो GIB जैसी अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए नया मॉडल बनेगा। देश के लिए यह सिर्फ एक पक्षी की कहानी नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की जीत है। जैसलमेर के रेगिस्तान में ये छोटे चूजे अब बड़े सपनों की उड़ान भरने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' और पर्यावरण संरक्षण के विजन को ये प्रयास मजबूती देते हैं।

Updated on:
15 Mar 2026, 3:48 PM IST
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