जयपुर

आप भी अपनी जमीन पर मोबाइल टावर लगवाना चाहते हैं ? जरूर पढ़ लें ये खबर

राजस्थान में सड़क हिस्से में लगे मोबाइल टावर (जीबीएम) की किराया राशि (उपयोग आ रही जमीन की दर) कम करने की फिर तैयारी है। इसके लिए दूसरे राज्यों की टेलीकॉम नीति के तहत निर्धारित दर से आकलन शुरू कर दिया गया है।

less than 1 minute read
Oct 22, 2022

जयपुर/पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क। राजस्थान में सड़क हिस्से में लगे मोबाइल टावर (जीबीएम) की किराया राशि (उपयोग आ रही जमीन की दर) कम करने की फिर तैयारी है। इसके लिए दूसरे राज्यों की टेलीकॉम नीति के तहत निर्धारित दर से आकलन शुरू कर दिया गया है। नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारी इसका अध्ययन करने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक मोबाइल ऑपरेटर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। इसके पीछे दूसरे राज्यों में दर कम होने का तर्क दिया जा रहा है। प्रदेश में किराए की गणना डीएलसी रेट की 10 प्रतिशत दर से किया जा रहा है। ऑपरेटर इसे घटाकर न्यूनतम 1 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि पहले भी यह मामला उठा था, लेकिन ठंडे बस्ते में चला गया था।

सहूलियत जारी:
डीम्ड एनओसी: प्रदेश में मोबाइल, ब्रॉडबैंड इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से जाल बिछाने के लिए सरकार डीम्ड एनओसी फार्मूले की सख्ती से पालना कराने का आदेश दे चुकी है। मोबाइल टावर लगाने, ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने व अन्य कार्य का आवेदन निर्धारित समय सीमा में निस्तारित नहीं करने पर डीम्ड एनओसी मानी जाएगी, यानी मोबाइल ऑपरेटर स्वत: ही काम कर सकेंगे। इनके लिए बनी पॉलिसी में आवेदन निस्तारण की समय सीमा अधिकतम 60 दिन तय की गई है।

सहारा लेने की छूट:
मोबाइल टावर लगाने का विरोध होने पर टेलीकॉम ऑपरेटर पुलिस का सहारा ले सकेंगे। इनमें ऐसे मामले होंगे, जिनमें टावर लगाने के लिए एनओसी ले ली गई हो। नगरीय विकास विभाग के प्रशासनिक प्रमुख ने इसके आदेश दिए। हालांकि, स्थानीय निकायों को टावर की एनओसी जारी करने से पहले जनता से आपत्ति-सुझाव मांगना अनिवार्य है, लेकिन इसमें पारदर्शिता नहीं बरती जा रही।

Published on:
22 Oct 2022 04:29 pm
Also Read
View All