
दिवित चबरवाल, उम्र- 7 वर्ष
एक बार बारिश का मौसम था। बंटी का मन घूमने का हो रहा था, इतने में बारिश शुरू हो गई। बंटी अपना लाल छाता लेकर बाहर घूमने निकला और पानी में उछल-कूद करने लगा। वहां एक मेंढक आ गया। मेंढक को देखकर बंटी उसके साथ खेलने लगा। खेलते-खेलते मेंढक उछलकर उसके छाते पर बैठ गया और बारिश का आनंद लेने लगा। इस तरह बंटी और मेंढक दोनों खुशी-खुशी बारिश का आनंद लेते रहे।
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यशश्वी मीणा, उम्र- 7 वर्ष
रवि को बारिश का मौसम बहुत पसंद था। जब तेज बारिश शुरू हुई तो वह अपना रेनकोट और गमबूट पहनकर, हाथ में लाल छाता लिए घूमने निकला। वह पानी में पैर मारकर खेल रहा था। उसी समय एक नन्हा मेंढक सूखी जगह ढूंढ रहा था। जैसे ही रवि उसके पास से गुज़रा, मेंढक ने एक लंबी छलांग लगाई और सीधे रवि के छाते के ऊपर जा बैठा। रवि को पहले तो समझ नहीं आया, लेकिन ऊपर देखा तो एक छोटा मेहमान मुफ्त की सवारी का मजा ले रहा था। रवि जोर से हंस पड़ा।
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मधुर बघेले, उम्र- 8 वर्ष
आज सुबह से बहुत तेज बारिश हो रही थी। मुझे घर में बैठे-बैठे बहुत बोर हो रहा था, इसलिए मैं अपनी सुंदर-सी लाल छतरी लेकर बाहर आ गया। बाहर रास्ते पर बहुत सारा पानी जमा हो गया था। छपाक-छपाक करने में बड़ा मज़ा आया! तभी मेरी छतरी के ऊपर कुछ गिरा। मैंने ऊपर देखा तो एक हरा मेंढक मेरी छतरी पर बैठा था! वह खुश था और "टर्र-टर्र" करके हंस रहा था। मैंने कहा, "अरे मेंढक भैया! क्या तुम भी मेरे साथ घूमोगे?" फिर हम दोनों पानी में खूब खेले।
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आरव डगला, उम्र- 9 वर्ष
एक दिन तेज बारिश हो रही थी। मुन्नी अपनी लाल छतरी लेकर खुशी-खुशी बाहर घूम रही थी। तभी उसने देखा कि एक छोटा हरा मेंढक बारिश में भीग रहा है। मुन्नी को उस पर दया आ गई। उसने अपनी छतरी मेंढक के ऊपर कर दी ताकि वह भीग न जाए। मेंढक बहुत खुश हुआ और उछलकर छतरी पर बैठ गया। कुछ देर बाद बारिश रुक गई। मेंढक ने "टर्र-टर्र" करके मुन्नी को धन्यवाद कहा। मुन्नी मुस्कुराई और बोली, "हमें हमेशा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।"
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याशिका हाड़ा, उम्र- 8 वर्ष
आज बहुत तेज बारिश हो रही है! मुझे बारिश में बहुत मजा आता है। मैं लाल जैकेट पहनकर बाहर आ गया। मैंने पैर में बड़े बूट भी पहने हैं ताकि पानी में छप-छप कर सकूं। जैसे ही मैं बाहर गया, पानी का गड्ढा दिखा। मैंने उसमें जोर से पैर मारा। तभी मुझे एक आवाज आई "टर्र-टर्र!" मैंने ऊपर देखा तो मेरे छाते के ऊपर एक छोटा-सा हरा मेंढक बैठा था। वह छाते के ऊपर ही बारिश का मजा ले रहा था। अब वह मेंढक मेरा नया दोस्त बन गया है।
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सिद्धविक सामर, उम्र- 8 वर्ष
सावन का महीना था और सुबह से ही रिमझिम बारिश हो रही थी। सिद्धविक बारिश धीमी होते ही अपनी लाल जैकेट, बैंगनी जूते और नारंगी छाता लेकर घर से बाहर निकल पड़ा। रास्ते में पानी के गड्ढों में छपाक-छपाक कूदते हुए उसे किसी के रोने की आवाज आई। उसने देखा, एक नन्हा हरा मेंढक तेज बहाव में बहने से बचने की कोशिश कर रहा था। सिद्धविक ने अपना छाता नीचे झुकाया। फुदककर मेंढक सीधे छाते के ऊपर जा बैठा।
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आयुषी, उम्र- 9 वर्ष
एक दिन तेज बारिश हो रही थी। रोहन छाता लेकर घर जा रहा था। तभी एक छोटा मेंढक उछलकर उसके छाते पर आ बैठा। मेंढक बारिश का आनंद ले रहा था और रोहन उसे देखकर मुस्कुरा रहा था। रोहन ने मेंढक को सुरक्षित जगह पर छोड़ दिया। मेंढक खुशी से "टर्र-टर्र" करने लगा। रोहन को भी बहुत अच्छा लगा और उसने सीखा कि हमें सभी जीवों से प्रेम करना चाहिए।
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चंद्रवीर सिंह झाला, उम्र- 10 वर्ष
प्रिंस नाम का लड़का बहुत भोला था। बाहर तेज बारिश की वजह से वह छाता लेकर निकला। रास्ते में उसे एक मेंढक पानी में कूदते हुए दिखा। उसका भी मन हुआ कि वह भी उसकी तरह कूदे। उसने मेंढक को अपने छाते में बिठाकर बारिश में खूब मजे किए। पहली बार ऐसा करने से उसे बहुत खुशी मिली। पहले वह मेंढक को देखकर डरता था, पर आज वह उसका दोस्त बन गया था।
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मधुसूदन पांडिया, उम्र- 13 वर्ष
एक गांव में चिंटू नाम का एक लड़का रहता था। तालाब में पिंकू नाम का एक मेंढक रहता था। चिंटू उसे दाने देता था, जिससे दोनों दोस्त बन गए। एक दिन बारिश हो रही थी। चिंटू अपना छाता लेकर बाहर निकला। रास्ते में उन्हें एक बिल्ली मिली, जो पिंकू को मारना चाहती थी। चिंटू ने उसे भगाने की कोशिश की, पर बिल्ली ने धक्का दे दिया जिससे छाते में छेद हो गया। पिंकू अपने दोस्त की मदद करना चाहता था। वह छाते पर बैठ गया ताकि चिंटू भीगने से बच जाए।
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दिग्विजय, उम्र- 11 वर्ष
सावन के महीने में अचानक रिमझिम बारिश होने लगी। चिंटू बहुत खुश हुआ। वह छाता लेकर घर से बाहर आ गया। रास्ते पर बने पानी के गड्ढों में वह उछल-उछलकर खेल रहा था। तभी अचानक उसने "टर्र-टर्र" की आवाज सुनी। अपना छाता झुकाकर देखा तो छाते के ऊपर एक छोटा-सा मेंढक बैठा था। चिंटू ने पास के तालाब में मेंढक को छोड़ने का निश्चय किया। उसने उसे वहां छोड़ दिया, मेंढक बहुत खुश हुआ और चिंटू घर वापस आ गया।
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पूर्वी शेखावत, उम्र- 10 वर्ष
एक बरसाती सुबह, मयंक अपनी लाल छतरी लेकर बाहर निकला। उसने महसूस किया कि उसकी छतरी पर हलचल हो रही है। वहां एक हरे रंग का खास मेंढक बैठा था। मयंक उसे देखकर खुश हो गया। तभी मेंढक ने कहा, "मैं एक जादुई मेंढक हूं। अगर हम साथ में इंद्रधनुष के अंत में जाएं तो वहां हमें बहुत सारी खुशियां मिलेंगी।" वे वहां पहुंचे और मयंक का दिन मजेदार हो गया। उसकी यह शाम बहुत सुंदर थी।
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श्लोक शर्मा, उम्र- 7 वर्ष
बारिश की पहली बूंद गिरते ही रोहन स्कूल से भागा। लाल छतरी खोली और नाचते हुए घर की तरफ चल पड़ा। कीचड़ में छपाक-छपाक करते हुए अचानक छतरी पर "टर्र-टर्र" की आवाज आई। ऊपर देखा तो एक हरा मेंढक छतरी के ऊपर बैठा मुस्कुरा रहा था। रोहन हंस पड़ा, "अरे दोस्त, तुम भी छतरी के नीचे आ जाओ।" मेंढक कूदकर छतरी की नोक पर आ गया और बारिश की बूंदों को पकड़ने लगा। उस दिन रोहन के पास एक नया दोस्त भी था।
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सान्वी, उम्र- 12 वर्ष
एक दिन तेज बारिश हो रही थी। रोहन अपना छाता लेकर बाहर घूमने निकला। रास्ते में पानी भरा हुआ था और वह खुशी-खुशी छप-छप करते हुए चल रहा था। तभी एक छोटा-सा हरा मेंढक उसके छाते पर आकर बैठ गया। शायद वह बारिश से बचना चाहता था। रोहन ने उसे ध्यान से देखा और मुस्कुरा दिया। वह धीरे-धीरे चलने लगा ताकि मेंढक डर न जाए। जब बारिश रुक गई तो मेंढक छाते से कूदकर हरी घास में चला गया।
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रिद्धि शेखावत, उम्र- 7 वर्ष
एक छोटू नाम का लड़का था। उसे बारिश बहुत पसंद थी। एक दिन वह अपना रेनकोट, बारिश के जूते और लाल छतरी लेकर बाहर निकल गया। रास्ते में एक मेंढक बारिश का आनंद ले रहा था। उसने छोटू को देखते ही उसकी छतरी पर छलांग मार दी। छोटू मेंढक को अपनी छतरी पर देखकर बहुत खुश हुआ और उसने उसका नाम टिंकू रख दिया। उसी दिन से टिंकू और छोटू अच्छे दोस्त बन गए। जब भी बारिश आती, वे मिलकर खेलते।
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गौरवी बरडिया, उम्र- 10 वर्ष
बारिश हो रही थी। छोटा मेंढक छतरी पर बैठा था और नीचे चिंटू छतरी लेकर चल रहा था। मेंढक बोला, "मैं तुम्हारी छतरी पकड़ लेता हूं।" चिंटू हंसते हुए बोला, "अरे भाई, तुम छोटे हो, उड़ जाओगे।" तभी तेज हवा आई। छतरी उड़ने लगी। चिंटू गिरने वाला था। तभी मेंढक ने अपने पैरों से छतरी को पकड़ लिया और अपने दोस्त को बचा लिया। चिंटू को समझ आ गया कि दोस्त छोटा हो या बड़ा, साथ दे तो भगवान जैसा होता है।
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विधि शर्मा, उम्र- 11 वर्ष
परसों मैं और मेरा भाई रोहन पार्क जा रहे थे। बहुत बारिश हो रही थी। हम पानी में उछल-कूद कर मजे कर रहे थे। अचानक मैंने कहा, "तेरे छाते पर देख!" ऊपर एक छोटा हरा मेंढक बैठा था। रोहन बोला, "हम इसका नाम मेढू रखते हैं।" मेढू छाते पर कूदता था। हम छाता घुमाते तो वह फिसल पड़ता, फिर वापस चढ़ जाता। बारिश रुकते ही मेढू कूदकर चला गया। घर जाकर मां को बताया तो मां खिलखिला पड़ीं।
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पारुल वेदवाल, उम्र- 7 वर्ष
रामपुर गांव में चीनू नाम का एक बच्चा रहता था। उसे बारिश का मौसम बहुत पसंद था। एक दिन बारिश शुरू हुई तो वह लाल रेनकोट और छाता लेकर बाहर निकल पड़ा। तभी उसे रोने की आवाज सुनाई दी। उसने देखा, सड़क के किनारे एक छोटा मेंढक पानी के तेज बहाव से बचने की कोशिश कर रहा था। चीनू ने अपना छाता नीचे किया और मेंढक को छाते के ऊपर बैठा दिया। मेंढक खुशी से आंखें मटकाने लगा। अब मोंटू हर बारिश में चीनू का इंतजार करता है।
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आरजू, उम्र- 8 वर्ष
एक दिन बारिश हो रही थी। चिंटू जिद करने लगा कि वह भी बारिश में नहाएगा। मां ने कहा, "ठीक है, थोड़ी देर नहाना।" चिंटू घर के अंदर से एक छाता ले आया और बारिश में घूमने लगा। तभी एक मेंढक आकर चिंटू के छाते पर बैठ गया। चिंटू ने ऊपर देखा तो बहुत खुश हुआ और छाता इधर-उधर लेकर घूमने लगा। थोड़ी ही देर में मेंढक छाते से नीचे कूद गया। चिंटू और मेंढक दोनों बहुत खुश थे।
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माही खंगार, उम्र- 11 वर्ष
रोहन ने देखा कि बाहर बारिश हो रही है। वह बारिश में खेलने चला गया। वह खेल ही रहा था तभी उसने देखा कि उसके छाते पर एक मेंढक बैठा हुआ है। उसने उसे अपने छाते पर ही रहने दिया। रोहन उस मेंढक को तालाब के किनारे ले गया और उसे वहां छोड़ दिया। मेंढक ने "टर्र-टर्र" कर उसे धन्यवाद कहा और तालाब में चला गया।
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दृश्य विजय, उम्र- 13 वर्ष
एक बरसाती सुबह, राहुल अपनी लाल छतरी लेकर बाहर निकला। उसे ऊपर से आवाज सुनाई दी, "ताजा समाचार! भारी बारिश जारी रहेगी!" राहुल ने ऊपर देखा तो छतरी पर एक हरा मेंढक बैठा था। मेंढक बोला, "मैं फ्रेडी, मेंढक मौसम संवाददाता हूं।" राहुल हंस पड़ा और फ्रेडी के साथ चलने लगा। रास्ते भर फ्रेडी रिपोर्टिंग करता रहा। तालाब के पास पहुंचकर फ्रेडी छतरी से कूदकर नीचे उतरा और बोला, "आज सफर कराने के लिए धन्यवाद!"
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आराध्या पारीक, उम्र- 11 वर्ष
एक दिन तेज बारिश हो रही थी। रोहन रंग-बिरंगी छतरी लेकर बाहर घूमने निकला। अचानक उसने देखा कि उसकी छतरी के ऊपर एक छोटा हरा मेंढक बैठा है। मेंढक बारिश से बचने के लिए उसकी छतरी का सहारा ले रहा था। रोहन धीरे-धीरे चलने लगा ताकि मेंढक डरकर गिर न जाए। कुछ दूर जाकर उसे एक छोटा तालाब दिखाई दिया। उसने छतरी को तालाब के पास झुका दिया। मेंढक खुशी-खुशी छलांग लगाकर पानी में चला गया।
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रूपम परिहार, उम्र- 4 वर्ष
एक तालाब में फ्रागी नाम का मेंढक रहता था। एक दिन वह तालाब से बाहर निकला और राहुल की लाल छतरी पर चढ़ गया। राहुल बारिश में घूम रहा था। उसने जब मेंढक को देखा तो मुस्कुरा दिया। फ्रागी भी खुश हो गया। राहुल पानी में कूदता और फ्रागी ऊपर से सब देखता। राहुल ने फ्रागी को कई जगहें दिखाईं। शाम को राहुल ने फ्रागी को उसके तालाब तक पहुंचा दिया। फ्रागी ने खुशी से एक ऊंची छलांग लगाई और पानी में गायब हो गया।
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सूर्यांशी सुल्तानिया, उम्र- 7 वर्ष
कल चिंकू के दोस्त पिंटू ने उसे जन्मदिन पर नारंगी रंग का छाता दिया। अगले ही दिन बारिश शुरू हो गई। चिंकू जैसे ही छाता लेकर घर से बाहर खेलने आया तो उसने देखा कि उसके छाते के ऊपर एक हरे रंग का मेंढक बैठ गया है। वह मेंढक भी बारिश की मस्ती में चिंकू के साथ नाचने लगा। वे दोनों अब दोस्त बन गए थे और जब भी बारिश आती, मिलकर खेलते।
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दिव्याप्रणव मेनारिया, उम्र- 8 वर्ष
एक गांव में अचानक बारिश शुरू हो गई। रोहन भीगना चाहता था, लेकिन मां ने मना कर दिया। रोहन उदास होकर दरवाजे के पास बैठ गया। तभी उसका दोस्त, एक मेंढक वहां आया और उदासी का कारण पूछा। मेंढक ने समझदारी दिखाते हुए रोहन से एक छाता और रेनकोट लाने को कहा। फिर मेंढक ने उसे छाता ओढ़ाया और खुद भी छाते के ऊपर जाकर बैठ गया। दोनों ने मिलकर बारिश का पूरा आनंद लिया।
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कान्हा माहेश्वरी, उम्र- 7 वर्ष
एक दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी। चिंटू अपने लाल छाते के नीचे आराम से सो रहा था। तभी उसने देखा कि एक छोटा-सा मेंढक पानी में भीग रहा है और ठंड से कांप रहा है। चिंटू ने कहा, "डरो मत दोस्त, यहां आ जाओ!" मेंढक ने खुशी से एक लंबी छलांग लगाई और चिंटू के छाते पर बैठ गया। छाते से दोनों भीगने से बच गए और पक्के दोस्त बन गए।
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गर्विष्ठ अधाना गुर्जर, उम्र- 7 वर्ष
एक दिन तेज बारिश हो रही थी। रोहन अपना नारंगी छाता लेकर बाहर घूमने निकला। रास्ते में अचानक एक छोटा हरा मेंढक उसके छाते पर आ बैठा। रोहन उसे देखकर खुश हो गया। वह धीरे-धीरे चलने लगा ताकि मेंढक गिर न जाए। दोनों ने बारिश का खूब आनंद लिया। कुछ देर बाद वे एक सुंदर तालाब के पास पहुंचे। रोहन ने प्यार से छाता झुकाया। मेंढक खुशी से छलांग लगाकर तालाब में कूद गया।
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हर्षित महोबिया, उम्र- 12 वर्ष
सुबह-सुबह आसमान में काले बादल छा गए। मैं अपनी लाल छतरी लेकर बाहर खेलने चला गया। पानी के छोटे-छोटे गड्ढों में कूदकर मैं पानी उछाल रहा था। तभी एक छोटा हरा मेंढक मेरी छतरी पर बैठ गया। मेंढक के उछलने से छतरी पर जमा पानी मेरे ऊपर गिरने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा। मैंने धीरे से कहा, "दोस्त, तुम बहुत शरारती हो!" बारिश कम होने पर मेंढक तालाब की ओर चला गया। प्रकृति के छोटे जीव भी हमारे अच्छे दोस्त बन सकते हैं।
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मनीष कुमार, उम्र- 9 वर्ष
रिमझिम बारिश हो रही थी। अंशु अपनी लाल छतरी लेकर घर की ओर भागा। रास्ते में वह पानी में छप-छप करता हुआ जा रहा था। तभी उसकी छतरी पर टप से एक छोटा हरा मेंढक आकर गिरा! मेंढक खुश होकर "टर्र-टर्र" कर रहा था। अंशु ने धीरे से कहा, "डरो मत दोस्त, मेरी छतरी में हम दोनों के लिए जगह है।" रास्ते में अंशु को एक बड़ा-सा गड्ढा दिखा। उसने छतरी को झुकाया और मेंढक छपाक से पानी में कूद गया।
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लक्ष्य सोलंकी, उम्र- 9 वर्ष
एक सुहावना दिन था, जब अचानक काले बादल छा गए और रिमझिम बारिश होने लगी। समर बहुत खुश हुआ! उसने झटपट अपनी पसंदीदा लाल छतरी उठाई और बाहर निकल पड़ा। समर को पानी के गड्ढों में छपाक-छपाक करना बहुत पसंद था। तभी उसकी नजर एक नन्हे मेंढक पर पड़ी। समर ने हंसते हुए अपनी छतरी आगे बढ़ाई ताकि मेंढक को भीगने से बचा सके। बारिश की बूंदों के बीच समर अपनी मस्ती में खोया हुआ था। यह दिन किसी जादुई सपने से कम नहीं था।
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याहवी बाहेती, उम्र- 11 वर्ष
रोनीत गर्मी की छुट्टी में गांव गया था। एक दिन बहुत बारिश हो रही थी। बारिश के मजे लेने वह छाता लेकर बाहर निकल गया। मैदान में एक छोटा-सा गड्ढा था। वह गड्ढे में जोर-जोर से कूदने लगा। सारा पानी उसकी छतरी पर आ गया। छतरी के ऊपर "टर्र-टर्र" की आवाज आने लगी। उसने छतरी नीचे कर देखा तो एक नन्हा-सा मेंढक छतरी के ऊपर बैठा था। वह मेंढक को लेकर घूमने लगा। थोड़ी देर बाद मेंढक फुदककर भाग गया।
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गुंजन सारस्वा, उम्र- 11 वर्ष
एक दिन तेज बारिश हो रही थी। केशव छाता लेकर घूमने निकला, तभी अचानक एक हरा मेंढक उसके छाते पर बैठ गया। केशव उसे अपने साथ लेकर आगे बढ़ा। रास्ते में पानी से भरे गड्ढों में केशव कूदकर पानी उछाल रहा था। थोड़ी देर बाद केशव एक बड़े गड्ढे की ओर बढ़ा, जिसमें पानी बहुत गहरा था। मेंढक ने जोर से आवाज लगाकर उसे सावधान किया। केशव रुक गया और मेंढक ने अपने दोस्त को बचा लिया।
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हितांशी चौबीसा, उम्र- 8 वर्ष
एक गांव में रमेश नाम का लड़का रहता था। एक दिन गांव में बहुत जोरों की बारिश हो रही थी। रमेश ने देखा कि एक मेंढक झाड़ियों में फंसा था। रमेश तुरंत छाता लेकर घर से बाहर निकला और मेंढक को निकाला। निकलते ही मेंढक उछलकर रमेश के छाते पर चढ़ गया। रमेश मेंढक को अपने घर में ले आया और दोनों में गहरी मित्रता हो गई।