
जयपुर। प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग और प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में संचालित लगभग आधी स्कूल बसें बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के सड़कों पर दौड़ रही हैं और विभाग मूकदर्शक बना बैठा है। केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 56 और नियमों के तहत 8 साल से पुरानी बसों के लिए हर साल तथा 15 साल से अधिक पुरानी बसों के लिए हर 6 महीने में फिटनेस नवीनीकरण अनिवार्य है।
सड़क सुरक्षा रोडमैप-2020 के तहत मई के महीने में गर्मी की छुट्टियों के दौरान सभी स्कूल बसों की जांच कर अनफिट बसों का फिटनेस प्रमाणपत्र रद्द किया जाना था। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2023-24 के दौरान सड़कों पर संचालित कुल स्कूल बसों में से 38 से 47 प्रतिशत बसें फिटनेस जांच के दायरे में थीं। इस अवधि में 11.48 फीसदी से लेकर 20.96 फीसदी तक बसें बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के ही बच्चों को ढोती रहीं।
विभाग ने कुल बसों में से केवल 55.93 से 74.62 फीसदी का ही निरीक्षण किया, जिनमें से 5 से 8 प्रतिशत से अधिक बसें अयोग्य पाई गईं। वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच निरीक्षण में 3,175 बसें अयोग्य पाई गईं, लेकिन परिवहन विभाग ने इनमें से एक भी बस का फिटनेस प्रमाणपत्र रद्द नहीं किया।
मामले में राज्य सरकार ने अप्रेल 2025 में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और भविष्य में इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। हालांकि, कैग के आंकड़े बताते हैं कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है, जिससे रोजाना हजारों स्कूली बच्चों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है।
| वर्ष | स्कूल बसें | फिटनेस करवाया (%) | बिना फिटनेस |
|---|---|---|---|
| 2018-19 | 12,385 | 5,049 (40.77%) | 596 |
| 2019-20 | 13,427 | 5,230 (39.05%) | 722 |
| 2020-21 | 13,725 | 5,215 (38.00%) | 1,093 |
| 2021-22 | 14,138 | 5,991 (42.38%) | 805 |
| 2022-23 | 14,918 | 6,641 (44.51%) | 761 |
| 2023-24 | 16,400 | 7,709 (47.00%) | 913 |
(2024-25 का डेटा कैग को उपलब्ध नहीं कराया गया)
परिवहन विभाग की इस ‘सिस्टमैटिक विफलता’ का खौफनाक परिणाम 21 अक्टूबर 2024 को कोटा में देखने को मिला। कोटा-हंसाबी रोड पर ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास स्कूल बस का स्टीयरिंग फेल हो गया था, जिससे बस अनियंत्रित होकर खाई में उतर गई थी। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 10 स्कूली बच्चे घायल हो गए। जांच में खुलासा हुआ कि दुर्घटना का मुख्य कारण यांत्रिक विफलता था। यह बस बिना वैध फिटनेस, परमिट और बीमा के अवैध रूप से सड़कों पर दौड़ रही थी, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन था।
1 नवंबर 2025 : कोटा के इटावा में स्कूल वैन की जीप से भिड़ंत में दो छात्राओं की मौत हुई और पांच बच्चे घायल हुए। रिपोर्ट में सामने आया कि वाहन पांच सीटर निजी वाहन था, जिसे मॉडिफाई कर आठ सीटर बनाया गया था।
सितंबर 2025 : नागौर के मेड़ता सिटी में बालवाहिनी हादसे में छात्रा की मौत हो गई। हादसे के बाद बालवाहिनी व्यवस्था की खामियां भी सामने आईं।
30 अप्रेल 2026: शिकरगढ़, जोधपुर में स्कूली बस और पिकअप की टक्कर में 12 बच्चे घायल हुए।
29 जुलाई 2026: बांसवाड़ा के ठीकरिया क्षेत्र में स्कूली वैन खड़े ट्रक में जा घुसी। हादसे में एक बच्चे की मौत हो गई और सात बच्चे घायल हो गए। अधिकतर के सिर और पैरों में गंभीर चोटें आईं।
वाहनों की फिटनेस जांच को पारदर्शी बनाने के लिए परिवहन विभाग ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की मंजूरी प्रक्रिया तेज कर दी है। मंगलवार को छह नए एटीएस को मंजूरी मिली। इसके साथ प्रदेश में स्वीकृत एटीएस की संख्या 49 हो गई है। जयपुर में दो तथा सीकर, डीडवाना, झुंझुनूं और पाली में एक-एक एटीएस को मंजूरी दी गई। इन केंद्रों पर मशीनों से वाहनों की फिटनेस जांच होगी, जिससे मैनुअल जांच में मानवीय हस्तक्षेप और मनमानी की आशंका कम होगी। पिछले पांच साल से धीमी पड़ी योजना को विभाग ने बीते छह माह में रफ्तार दी है। हालांकि, जयपुर के बीलवा स्थित एक एटीएस के दस्तावेज में गड़बड़ी की शिकायत पर मंजूरी रोककर दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है।