
Rajasthan : राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव नहीं होने के कारण प्रदेश में बनाए गए 9 नए जिलों में अब तक जिला परिषदों का गठन नहीं हो पाया है। इसका असर ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की योजनाओं के संचालन पर भी दिखाई दे रहा है। विभाग को फिलहाल नए जिलों के बजाय पुराने जिलों की जिला परिषदों के माध्यम से ही योजनाओं का संचालन करना पड़ रहा है। एक जुलाई से शुरू हुई विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन का संचालन भी पुरानी जिला परिषदों के जरिए किया जाएगा।
वहीं, नवगठित ग्राम पंचायतों के चुनाव नहीं होने से राशि और कार्यों का आवंटन भी पुरानी ग्राम पंचायतों के आधार पर ही किया जाएगा। हाल ही में राजस्थान सरकार ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रशासनिक व्यय की स्वीकृति जारी की है।
इसके साथ ही परियोजना निदेशक ओमकारेश्वर शर्मा ने निर्देश दिए है कि योजना का संचालन पूर्व की नोडल जिला परिषदों के माध्यम से ही किया जाए। इससे साफ है कि जब तक नए जिलों में जिला परिषदों का गठन नहीं हो जाता, तब तक ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की योजनाओं का संचालन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पुराने जिलों की जिला परिषदों के जरिए ही जारी रहेगी।
अशोक गहलोत सरकार ने 2023 में 19 नए जिले और 3 नए संभाग घोषित किए गए, जिससे राजस्थान में कुल 50 जिले हो गए थे। इसके बाद दिसंबर 2024 भाजपा सरकार के आने के बाद भजनलाल शर्मा सरकार ने 9 नए जिले और 3 नए संभाग को निरस्त कर दिया। सरकार के इस नए फैसले के बाद राजस्थान में कुल 41 जिले और 7 संभाग बचे रहे।
जिले रद्द : भजनलाल सरकार ने दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीम का थाना, गंगापुर सिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, सांचौर जिले रद्द किए।
नए जिले: भजनलाल सरकार ने प्रशासनिक जरूरत के आधार पर बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, फलौदी, सलम्बूर बनाए।
श्रीगंगानगर, धौलपुर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, करौली, सवाई माधोपुर, जैसलमेर, पाली, दौसा, जयपुर, सिरोही, झुंझुनू, सीकर, बूंदी, बारां, झालावाड़, कोटा, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, राजसमंद, बाड़मेर, जालौर, भरतपुर, जोधपुर , अलवर, प्रतापगढ़, अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, उदयपुर, बालोतरा, डीडवाना, फलौदी, सलूंबर, खैरथल-तिजारा, डीग, कोटपूतली-बहरोड, ब्यावर।