समाज सुधार से संस्कार तक, 68 साल से सक्रिय है संगठन 1958 में हुई शुरुआत, तब से कार्यालय गणगौरी बाजार में पदयात्रा, आदिवासी दिवस और सामूहिक विवाह से समाज को जोड़ रहा संघ प्रदेशभर में संगठन की इकाइयां सक्रिय 91 वर्षीय लक्ष्मी नारायण मीणा सबसे बुजुर्ग सदस्य
जयपुर। सामाजिक सरोकारों और सामुदायिक एकजुटता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान आदिवासी मीणा सेवा संघ पिछले 6 दशकों से प्रदेशभर में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्ष 1958 में स्थापित यह संगठन मीणा आदिवासी समाज के सामाजिक उत्थान, शिक्षा जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और आपसी विवादों के समाधान जैसे मुद्दों पर लगातार काम कर रहा है।
संघ का पहला कार्यालय शहर के गणगौरी बाजार स्थित भैरुजी के मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था और वर्तमान में भी यहीं से इसकी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। संगठन के प्रथम अध्यक्ष गोविंद राम मीणा थे, जिन्होंने स्थापना काल में समाज को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। संघ की संरचना प्रदेश से लेकर जिला और तहसील स्तर तक फैली हुई है। विभिन्न इकाइयों में समय-समय पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों का चयन किया जाता है, जो स्थानीय स्तर पर बैठकों, सामाजिक मंथन और सेवा कार्यों के जरिए समाजहित के मुद्दों को आगे बढ़ाते हैं।
900 से अधिक दंपतियों के घर टूटने से बचाए
विधायक एवं संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामकेश मीणा ने बताया कि संघ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाता है। संघ की पहल से पिछले एक साल में प्रदेशभर में 400 से अधिक बाल विवाह के मामले टाले और रुकवाए हैं। इसके अलावा वैवाहिक विवादों में समझाइश की भूमिका निभाते हुए करीब नो सौ से अधिक दंपतियों में आपसी विवादों के मामलों में आपसी सहमति से समाधान करवाया गया, जबकि कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया के जरिए तलाक भी करवाया गया है।
पारंपरिक पदयात्रा बनी पहचान, 125 शादियां सादगी से
संघ के जयपुर महानगर अध्यक्ष हरि नारायण मीणा ने बताया कि सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भी संघ समाज को जोड़ने का प्रयास करता है। गलताजी स्थित आम्बागढ़ दुर्ग पर प्रतिवर्ष आदिवासी दिवस का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन भाग लेते हैं। वहीं गुप्त नवरात्रि की अष्टमी को गेटोर गांव से निकलने वाली पारंपरिक पदयात्रा भी संघ की पहचान बन चुकी है, जो सामाजिक आस्था और एकजुटता का प्रतीक मानी जाती है। वहीं जयपुर में पिछले एक साल में तीन सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें करीब 125 शादियां सादगी से संपन्न हुईं।