राजस्थान की राजनीति में अपने बेबाक अंदाज और 'जनता के वकील' के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा एक बार फिर विधानसभा में अपने आक्रामक भाषण को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। "बाबा" के नाम से मशहूर डॉ. मीणा ने सदन में न केवल नकली खाद माफियाओं के खिलाफ अपनी 'छापेमारी' का बचाव किया, बल्कि नैतिकता और पद त्याग की अपनी पुरानी परंपरा को भी दोहराया।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के तेवरों से गरमाया हुआ है। कृषि मंत्री डॉ. मीणा का सदन में दिए एक वक्तव्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इसमें डॉ मीणा आक्रामक अंदाज़ में विपक्ष पर निशाना साधते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे फैक्ट्रियों और गोदामों में उनके द्वारा किए जा रहे औचक निरिक्षण और सामने आई गड़बड़ियों से लेकर अपने इस्तीफे का ज़िक्र करते दिख रहे हैं।
बयान में उन्होंने कहा कि क्या मंत्री का काम सिर्फ ऐशो-आराम करना है? ये भी साफ कहा कि अगर वे किसानों के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, तो उनका मंत्री बने रहना बेकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें छपने या छाने का शौक नहीं है, वे केवल उस किसान के प्रति जवाबदेह हैं जिसने उन्हें चुनकर भेजा है।
डॉ. मीणा ने सदन में उस चर्चित छापेमारी का जिक्र किया जो उन्होंने किशनगढ़ (अजमेर) में की थी। उन्होंने बताया:
कांग्रेस एमएलए नरेंद्र बुडानिया द्वारा 'छा जाने के लिए छापे' मारने के आरोप पर डॉ. मीणा भावुक और आक्रामक दोनों नजर आए। उन्होंने संघ के संस्कारों का जिक्र करते हुए कहा— "नहीं चाहिए पद यश कर्म, सभी चढ़े मां के चरण।"
डॉ. मीणा ने अपने पुराने इस्तीफे का जिक्र करते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने याद दिलाया कि:
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने 'संविधान बदलने' और 'आरक्षण खत्म होने' का झूठ फैलाकर जनता को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि वे खुद एससी-एसटी समुदाय के बीच गए और उन्हें समझाया, लेकिन विपक्ष के भ्रम के कारण सीटें कम हुईं, जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने खुद ली।