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Rajasthan: ओरण बचाने की दिशा में राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, जैसलमेर में 3666 हेक्टेयर भूमि आरक्षित

Oran In Jaisalmer: जैसलमेर में पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ओरण व्यवस्था को बचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिले के विभिन्न गांवों में 3666.2139 हैक्टेयर भूमि ओरण के रूप में आरक्षित कर पारिस्थितिकी संतुलन मजबूत करने की कोशिश की गई है।

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा। फाइल फोटो- पत्रिका

जयपुर। जैसलमेर जिले में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं के सम्मान में राज्य सरकार ने ओरण भूमि के आरक्षण के लिए कदम उठाए हैं। जैसलमेर के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। राज्य सरकार ने जिले के विभिन्न गांवों में ओरण के लिए कुल 3666.2139 हैक्टेयर भूमि आरक्षित की है।

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सामाजिक-धार्मिक मान्यता

ओरण प्राचीन काल से चली आ रही एक ऐसी व्यवस्था है जहां सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं के कारण स्थानीय लोग इन पवित्र उपवनों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन क्षेत्रों में पेड़ों को काटना या कुल्हाड़ी का उपयोग करना वर्जित है, जिससे यहां का पारिस्थितिकी तंत्र स्वतः ही सुरक्षित रहता है।

राज्य सरकार की ओर से जैसलमेर जिले के विभिन्न गांवों में ओरण के लिए कुल 3666.2139 हैक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है, जिसमें रामगढ़ तहसील के ग्राम दिलावर का गांव में 124.9502 हैक्टेयर, कुछड़ी ग्राम में 1084.8043 हैक्टेयर और पूनमनगर ग्राम में 583.9876 हैक्टेयर, फतेहगढ़ तहसील के ग्राम भीमसर में 952.2752 हैक्टेयर और बींजोता में 96.7716 हैक्टेयरभूमि ओरण क्षेत्र के लिए आरक्षित की गई है।

जानिए क्या होता है ओरण

जैसलमेर तहसील के ग्राम मोकला के तीन खण्डों में क्रमशः 187.364, 256.2511 और 253.4034 हैक्टेयर तथा बीरमा काणोद 126.4065 हैक्टेयर भूमि आरक्षित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त जैसलमेर तहसील के ग्राम मोकला में 1457.4991 हैक्टेयर, नाचना तहसील के ग्राम आसकन्द्रा में 225.03 हैक्टेयर एवं ग्राम दिधू में 229.5067 हैक्टेयर, ग्राम मोहनगढ़ बारानी/पन्नोधराय में 333.9165 हैक्टेयर क्षेत्रों को भी ओरण के रूप में आरक्षित करने की कार्यवाही की जा रही है।

'ओरण' जो संस्कृत शब्द 'अरण्य' से बना है और जिसका अर्थ 'बिना छेड़ा हुआ जंगल' होता है। यह न केवल हमारी प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है बल्कि मरुस्थलीकरण को रोकने में भी सहायक है। यह पहल न केवल जैसलमेर के पारंपरिक आस्था स्थलों का संवर्धन करेगी बल्कि मरुस्थलीय क्षेत्र में हरियाली और जैव विविधता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

जयपुर में प्रदर्शन

वहीं दूसरी तरफ जयपुर में चारागाह और वन क्षेत्र यानी ओरण भूमि के संरक्षण को लेकर गुरुवार को बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन से “ओरण बचाओ” पदयात्रा शुरू की गई, जिसमें जैसलमेर समेत प्रदेश के कई जिलों से सैकड़ों लोग शामिल हुए।

पदयात्रा का उद्देश्य मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर सरकार का ध्यान ओरण भूमि की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की ओर आकर्षित करना था। हालांकि पुलिस ने पदयात्रा को भवानी निकेतन के पास ही रोक दिया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। इस दौरान पदयात्रियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। आंदोलन में शामिल बाड़मेर जिले के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।