Assembly by-elections : राजस्थान में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता गुरुवार को हट जाएगी, लेकिन अगले छह माह के अंदर फिर से भाजपा-कांग्रेस को चुनावी अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा।
सुनील कुमार सिसोदिया/अरविन्द सिंह शक्तावत. राजस्थान में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता गुरुवार को हट जाएगी, लेकिन अगले छह माह के अंदर फिर से भाजपा-कांग्रेस को चुनावी अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा। सबसे बड़ी अग्नि परीक्षा विधानसभा उपचुनावों की होगी। इसके साथ ही नगर निगम, नगर परिषद्, नगर पालिकाओं और फिर पंचायतों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों की तैयारी भी अभी से करनी होगी।
प्रदेश में चुने गए 25 सांसदों में पांच विधायक सांसद बने हैं। इनमें तीन कांग्रेस, एक आरएलपी और एक बीएपी के विधायक हैं। टोंक-सवाई माधोपुर से हरीश मीणा (कांग्रेस), झुंझुनूं से बृजेन्द्र ओला (कांग्रेस), दौसा से मुरारीलाल मीना (कांग्रेस), बांसवाड़ा से राजकुमार रोत (बीएपी), नागौर से हनुमान बेनीवाल (आरएलपी) इनके सांसद बनने से 5 विधानसभा सीटें रिक्त हो जाएंगी। नियमानुसार, विधायकों को 14 दिन में विधानसभा से इस्तीफा देना होगा और नहीं देते हैं तो इसके बाद स्वत: ही इनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद से छह माह के अंदर भारत निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने हैं।
जिन पांच विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, इनमें से एक भी भाजपा के पास नहीं है। ऐसे में बीजेपी के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। इन्हें जीतने के लिए संगठन को मजबूत करना होगा।
सत्ता में होने की वजह से एंटी इंकंबेंसी न हो। इसका ध्यान रखना होगा।
संगठन महामंत्री की जितनी जल्दी नियुक्ति होगी फायदा होगा।
प्रदेश अध्यक्ष को बदलना है या नहीं, इस पर भी निर्णय करना होगा।
मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर चर्चा पहले से ही चल रही है। इस पर भी निर्णय करना होगा।
आगामी बजट में भी इन क्षेत्रों का विशेष ध्यान रखना होगा।
जातिगत समीकरण, जो बिगड़े हैं। उन्हें साधने पर काम करना होगा।
कम सीटें आने से भाजपा के अंदर से भी विरोध की चिंगारियां उठ सकती हैं, उन्हें भी संभालना होगा।
ब्यूरोक्रेसी पर नियंत्रण रखना होगा।
विधायकों की खाली हुई सीटों पर कब्जा बरकार रखना बड़ी चुनौती
लोकसभा चुनाव की तरह एकजुटता के साथ मैदान में उतरना होगा
खाली पड़े तमाम संगठन के पदों को भरना होगा
प्रदेश और जिलों के संगठन के निष्कि्रय पदाधकारियों को हटाना होगा
सड़क और सदन के अंदर जनता के मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाना होगा
बड़े नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखना होगा
प्रदेश में जिन पांच विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होंगे, वे सभी सीटें कांग्रेस और सहयोगी दलों की हैं। इनमें 3 कांग्रेस और एक-एक बीएपी व आरएलपी की है। ऐसे में इंडिया गठबंधन को पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा। अभी प्रदेश में भाजपा सरकार है, इसका असर नहीं हो। इसके लिए स्थानीय संगठन को मजबूत करना होगा। क्षेत्र में लगातार पार्टी के कार्यक्रम आयोजन कर माहौल बनाए रखना होगा। फिर सभी सीटें जीतें तो कांग्रेस के पक्ष में प्रदेश में अच्छा माहौल बनेगा, जिसके स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में फायदा मिलेगा।